| |
आणविक एवं
मानव
आनुवंशिकी
प्रभाग
वैज्ञानिक
-
डॉ.
समित आढ्य
(अध्यक्ष)
-
डॉ.
सुशांत राय
चौधुरी
-
डॉ.
कुणाल राय
-
डॉ.
(श्रीमती) केया
चौधुरी
-
डॉ.
ए. के. गिरि
-
डॉ.
समीर कुमार
दत्त
-
डॉ.
शुभेन्द्र
नाथ भट्टाचार्य
परिकल्पना
इस प्रभाग
का प्रधान लक्ष्य
भारतीय आबादी
में आम तौर पर
पाए जाने वाले
रोगों के
आणविक
आनुवंशिक
आधार को समझना
है ताकि
पैथोजेनिक
माइक्रोआर्गेनिज्म
में जीन
प्रकटीकरण एं कार्य
का अध्ययन
किया जा सके
और साथ ही बेहतर
लक्षणों वाले
ट्रांसजेनिक
पौधों को
उगाया जा सके।
उद्देश्य
-
सिर
और गर्दन के
कैंसर (एच. एन.
एस. सी. सी.) में
जेनेमिक
अस्थिरता के
आणविक आधार को
स्पष्ट करना तथा
इस कैंसर के
विकास में
शामिल
पुटेटिव ट्यूमर
सप्रेशर
जीनों की पहचान
करना ।
-
हेलिकोबैक्टर
पाइलोरी
युक्त
गैस्ट्रोडुयोडोनल
रोगों में
प्रवणता एलेस
को चिह्नित करना
।
-
मौखिक
सबमुकोस
फाइब्रोसिस
के आणविक
पैथजेनेसिस
का अध्ययन
करना ।
-
हैमोफिलिया,
ग्लौकोमा,
विल्सन रोग और
ओकुलोटेयस
अल्बिनिज्म
के आणविक
आनुवंशिकी को
समझना ।
-
पश्चिम
बंगाल में
आर्सेनिक
युक्त पानी को
पीने वाली
आबादी में
स्वास्थ्य
प्रभाव,
आनुवंशिक
क्षति और आनुवंशिक
वैभिन्नता का
मूल्यांकन
करना ।
-
काली
चाय
पोलिफेनोल
थियाफ्लेविन
एवं थियारूबिगिन
के
एंटीमूटाजेनिक
और
एनिकार्सिनोजेनिक
प्रभाव की जॉच
करना ।
-
विभिन्न
प्रकार से
प्रकट वी.
कोलरा जीन की
पहचान करना,
जो होस्ट में
संक्रमण पैदा
करता है और
पैथोजेनेसिस
में उसकी भूमिका
तथा वी. कोलरा
संक्रमण में
मानव आंत्रिक
एपिथेलियल
कोशिका की
प्रतिक्रिया
का अध्ययन करना
।
-
जैवरासायनिक
एवं
उत्क्रमित
आनुवंशिक
दृष्टिकोण के
योग का उपयोग
करते हुए
काइनेटोप्लास्टिड
प्रोटोजून
लिशमानिया के
मिटोकोंड्रिया
में नाभिकीय
इनकोडेड टी.
आर. एन. ए. के आगमन
के आणविक आधार
का अध्ययन
करना।
-
किटाणुओं
के विरूद्ध
स्वतः
रक्षात्मक
क्रियाविधि
में शामिल
गैर-होस्ट
पौधों से
जीनों की
पहचान करना,
वियोजित करना
और उन्हें
आशोधित करना
तथा
होस्ट-पौधों
में उन्हें
जैव-कीटनाशकों
के रूप में
स्थानांतरित
करना ।
दल के
सदस्य
वरिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
कनिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
अनुसंधान
सहायक
स्टाफ
सदस्य
| नाम |
पदनाम |
ई-मेल आई.
डी. |
| श्री भास्कर
बसु |
|
|
| श्री तापस
चौधुरी |
|
|
| श्रीमती
महुआ
भट्टाचार्य |
|
|
| डॉ. रजत बनर्जी |
|
banerjra@mail.nih.gov |
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परियोजना
सहायक /
ग्रीष्म
प्रशिक्षु
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एस., धर जी.,
मुखर्जी एस.,
महता बी.,
चटर्जी एस.,
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आढ्या एस.
(2006)
लिशमानिया
मिटोकोंड्रिया
से प्राप्त एक
द्वि-कार्यात्मक
टी. आर. एन. ए. आयात
रिसेप्टर ।
प्रोक.
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यू. एस. ए., 103,
8354-8359
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महता
बी.,
भट्टाचार्य
एस. एन.,
मुखर्जी एस.
और आढ्या एस.
(2005) साइटोप्लास्मिक
टी. आर. एन. ए. के
संमिश्र-मध्यस्थ
आयात द्वारा
रोगी से उत्पन्न
मुटैंट
मिटोकोंड्रिया
में रूपांतरणीय
त्रुटि का
सुधार ।
जे.
बायोकेम., 280,
5141-5144
-
भट्टाचार्य
एस. एन. और
आढ्या एस.
(2004) टी. आर. एन.
ए.-चालित ए. टी.
पी.
हाइड्रोलाइसिस
और लिशमानिया
मिटोकोंड्रियल
टी. आर. एन. ए.
आयात संमिश्र
के द्वारा
मेम्ब्रेन
सक्षमता का
उत्पादन ।
जे.
बायोकेम., 279,
11259-11263
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घोष
एस., गोस्वामी
एस. और आढ्या
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मैक्रोफेज के
भीतर
लिशमानिया के
जीवित रहने
में सुपर
आक्साइड
डिस्मुटेस की
भूमिका ।
बायोकेम.
जे., 369,
447-452
-
गोस्वामी
एस., चटर्गी एस.,
भट्टाचार्य
एस. एन., बसु एस.
और आढ्या एस.
(2003) टी. आर. एन.
ए. आयात का
एलॉस्टेरिक
नियमन :
लिशमानिया
मिटोकोंड्रिया
के आंतरिक
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टी. आर. एन. ए.
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अंतर्क्रिया
।
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एसिड. रिस., 31,
5552-5559
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एस. एन., चटर्जी एस.,
गोस्वामी एस., त्रिपाठी
जी., दे एस. एन. और आढ्या
एस. (2003) बहुप्रोटीन
संमिश्र के भीतर
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टी. आर. एन. ए. आयात
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"पींग-पंग" अंतर्क्रिया ।
मोल. सेल. बायो., 23, 5217-5224
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भट्टाचार्य
एस. एन., चटर्जी एस.
और आढ्या एस. (2002)
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जो आंतरिक मेम्ब्रेन
पर सहयोगात्मक
रूप से विरोधी
रूप में अंतर्क्रिया
करता है । मोल.
सेल. बायो., 22, 4372-4382
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मित्रा
एस., सिकदार एन., मिश्रा
सी., गुप्ता एस., पाल
आर. आर., राय बी., पांडा
सी. के. और राय चौघुरी
एस. (2005) पूर्वी
भारत से तंबाकू
संबंधित ल्यूकोप्लाकिया
और मौखिक कैंसर
रोगी में p52 जेनोटाइप
एवं हैप्लोटाइप
का जोखिम मूल्यांकन
। इंटर. जे. कैंसर,
117, 786-793
-
चक्रवर्ती
एस., सेनगुप्त एस.,
सेनगुप्त ए., बसाक
एस. एन., राय ए., पांडा
सी. के. और राय चौघुरी
एस. (2006) भारतीय
आबादी से सिर एवं
गला के स्क्वेमस
कोशिका कार्सिनोमा
में जेनोमिक अस्थिरता
। मोल. कार्सिनोजेनेसिस,
45, 270-277
-
मंडल
जी., बोराल आर. एन.
और राय चौघुरी
एस. (2006) स्पाइंडल
एसेंबली चेकप्वायंट
में Mad2 / Cdc20 संमोश्र
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Cdc20 के एक
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वाला क्षेत्र महत्दपूर्ण
है । बायोकेम.
जे. 396, 243-253
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चक्रवर्ती
एस., घोष ए., चौधुरी
ए., सांत्रा ए., हेम्ब्रम
जे. और राय चौघुरी
एस. (2006) हेलिकोबैक्टर
पाइरोली युक्त
डुयोडोनल अल्सर
में प्रवणशीलता
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ILiB जीन
प्रवर्धक पोलिमोर्फिज्म
के बीच अंतर्क्रिया
। ह्युमन म्टेशन,
27, 411-419
-
गुप्ता
ए., ऎक्यलथ डी., नियोगी
आर., दत्ता एस., बसु
के., माइती बी., प्रिवेदी
आर., राय जे., दास एस.
के., गंगोपाध्याय
पी. के. और राय के.
(2005) विलसन रोग का
आणविक पैथोजेनेसिस
: भारतीय रोगियों
में विद्यमान मुटेशन
और जेनोटाइप-फेनोटाइप
सहसंबंध का हेपाटोटाइप
विश्लेषण, खोज
। ह्युमन जेनेटिक्स,
118, 49-57
-
चाकी
एम., सेनगुप्ता
एम., मुखोपाध्याय
ए., सुब्बाराव आई.,
मजुमदार पी. पी.,
दास एम., सामंत एस.
और राय के. (2006)
भारत के विभिन्न
मूल निवासियों
में ओ. सी. ए. 1 प्र्मुखत
: टाइरोसिनेस जीन
में स्थापाक मुटेशन
के कारण होता है
। एनल्स अॉफ ह्युमेन
जेनेटिक्स, (अॉनलाइन
प्रकाशन दिनांक
3 मार्च, 2006)
-
सरकार
एम. एवं चौधुरी
के. (2004) विव्रियो
किलरा द्वारा मानव
आंत एप्त्थेलियल
कोशिकाओं में इटरल्यूकिन
8 प्रवेश में
पालन एवं गतिशीलता
का योग । माइक्रोब
इनफेक्स. 6, 676-685
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पाल
आर. आर., मुख्रर्जी
ए., दत्त पी. के., बनर्जी
एस., पाल एम., चटर्जी
जे., मुखोपाध्याय
के. और चौधुरी के.
(2005) मौखिक पूर्वकैंसर
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लिए एक नया वैवलेट-न्यूरल
नेटवर्क-आधारित
पैथोलोजिकल प्रावस्था
खोज तकनीक । जे.
क्लिन. पैथो. 58, 932-938
-
सरकार
एम., दास एस., वंद्योपाध्याय
ए., राय के. एवं चौधुरी
के. (2005) विव्रियो
किलरा पैथोजेनेसिस
द्वारा मानव आंत
एपिथेलियल कोशिकाओं
में मिटोकोंद्रियल
एन. ए. डी. एच. डिहाइड्रोजेनेस
सबयूनिट 5 का अपनियमन
। एफइबीएस लेटर.
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-
दत्त
के., उषा आर., दत्ता
एस. के. और सिंह एम.
(2001) शाखायूक्त
बीन प्रोटीज निषेधकों
का तुलनात्मक अध्ययन
और प्रोटीजों के
साथ उनकी अंतर्क्रिया
। प्लांट फिजियो.
बायोकेम. 39, 949-959
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घोष
पी., बसु ए., महता जे.,
बसु एस., सेनगुप्त
एम., दास जे. के., मुखर्जी
ए., सरकार ए., के., मंडल
एल. के., राय के. और
गिरि ए. के. (2006)
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बसु
अनामिका, सोम अरूंधति,
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ड. एन. ए. क्षति का
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लेटर. 159, 100-112
-
हाल्दार
बी., प्रामाणिक
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एस. और गिरि ए. के.
(2005) बहुविध जांच
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43(4), 591-597
-
बरसु
ए., घोष पी., दास जे.
के., बनर्जी ए., राय
के. और गिरि ए. के.
(2004) भारत के पश्चिम
बंगाल में पेय
जल के माध्यम से
आर्सेनिक वाली
आबादी में कार्सिनोजेम
के बायोमेकर का
रूप में माइक्रोन्यूक्लि
। कैंसर एपिडेमियोलोजी,
बायोमेकर एवं प्रिवेंसन.
13, 820-827
-
महता
जे., बसु ए., घोषाल
एस., सरकार जे. एन.,
राय ए. के, नटराजन
ए. टी. और गिरि ए. के.
(2004) इन विट्रो
पेरिफेरल लिंफोसाइट
पर सोडियम आर्सेनिक
का प्रभाव : पेय
जल के कारण आर्सेनिक
से ग्रस्त आबादी
के बीच व्यक्तिगत
प्रवणशीलता । मुटाजेनेसिस.
19, 1-7
-
महता
जे., बसु ए., घोषाल
एस., सरकार जे. एन.,
राय ए. के, पोद्दार
जी., नन्दी ए. के., बनर्जी
ए., राय के., नटराजन
ए. टी., निलशन आर. और
गिरि ए. के. (2003)
भारत के पश्चिम
बंगाल में पेय
जल के माध्यम से
आर्सेनिक से ग्रस्त
व्यक्ति में क्रोमोजोमल
एबेरेशन एवं सिस्टर
क्रोमोटिड परिवर्तन
। मूटेशन रिसर्च,
534, 133-143
-
बसु
ए., महता जे., राय ए.
के, सरकार जे. एन.,
पोद्दार जी., नन्दी
ए. के., सरकार पी. के.,
दत्त पी. के., बनर्जी
ए., दास एम., राय के.,
राय चौधुरी एस.,
नटराजन ए. टी., निलशन
आर. और गिरि ए. के.
(2002) भारत के पश्चिम
बंगाल में पेय
जल के माध्यम से
आर्सेनिक से ग्रस्त
व्यक्ति में माइक्रोन्यूक्लि
की वर्धित तीव्रता
। मुटेशन रिसर्च,
516, 29-40
-
गुप्त
एस., साहा बी., और गिरि
ए. के. (2002) हरी चाय
और काली चाय का
नुलनात्मक एंटीमुटेजेनिक
और एंटीक्लास्टोजेनिक
प्रभाव : एक समीक्षा
। मुटेशन रिसर्च,
512, 37-65
-
गुप्त
एस., चौधुरी टी., गांगुली
डी. के. और गिरि ए.
के. (2001) स्वीस
अल्बिनो चूहे में
कली चाय (विश्व
स्तरीय) का एंटीक्लास्टेजेनिक
प्रभाव और उसका
दो सक्रिय पोलिफेनोल्स
थियाफ्लेविन और
थियारूबिगिन इन
विवो । लाइफ साइंसेस
69, 2735-2744
-
बसु
ए., महता जे., गुप्ता
एस., और गिरि ए. के.
(2001) पाराडॉक्सिकल
मानव कार्सिनोजेन
आर्सेनोक का आनुवंशिक
टॉक्सिकोलोजी
: एक समीक्षा । मुटेशन
रिसर्च, 488, 171-194
|
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