| |
संक्रामक
रोग और प्रतिरक्षा
प्रभाग
वैज्ञानिक
-
डॉ.
हेमन्त के.
मजुमदार (अध्यक्ष)
-
डॉ.
पियूष के. दास
-
डॉ.
चित्रा मंडल
-
डॉ.
श्यामल राय
-
डॉ.
शांतनु
वंद्योपाध्याय
-
डॉ.
नाहीद आली
-
डॉ.
रुखसाना चौधुरी
-
डॉ.
रुपक के. भद्र
-
डॉ.
तृप्ति दे
-
डॉ.
देवयानी मंडल
-
श्रीमती
नीता वी. एम.
खालको
-
डॉ.
उदय वंद्योपाध्याय
-
डॉ.
मालिनी सेन
-
डॉ.
अनिन्द्य
दासगुप्त
परिकल्पना
संक्रामक
रोग पूरे
विश्व में
गंभीर
स्वास्थ्य
संबंधी
समस्या के रूप
में विद्यमान
है । औषधि
प्रतिरोधी नए
क्लोन के पैदा
होने के कारण
समस्या और भी
जटिल हो गई है
। संक्रामक
रोगों को नियंत्रित
करने, उन्हें
समाप्त करने
या दूर करने
में प्रगति
करना आज अंतरराष्ट्रीय
स्वास्थ्य
एजेंडा का एक
महत्वपूर्ण
भाग है । इस
तथ्य को ध्यान
में रखते हुए
भारतीय
रासायनिक एवं
जीव विज्ञान
संस्थान का यह
प्रभाग
आंत्रिक
लिशमानियासिस
के कारक एजेंट
लिशमानिया
डोनोवनी और
विव्रिओ कलरा
एवं शिगेला
प्रजाति जैसे
बडे़
एंट्रोपैथोजीन
पर विभिन्न
प्रकार के
अनुसंधान
कार्यक्रम
आयोजित कर रहा
है, जो भारत में
स्वास्थ्य
संबंधी बड़ी
समस्या है ।
जेनोमिक्स
एवं
प्रोटियोमिक्स
का प्रयोग
करके आई. आई. सी.
बी. के समूह ने
मनव पैथोजीन
द्वारा होने
वाले रोगों को
नियंत्रित
करने के लिए हस्तक्षेप
करना प्रारंभ
कर दिया है । इन
रणनीतियों
में शामिल है -
-
हीस्ट-पैरासाइट
अंतर्क्रिया
का निवारण
-
नए
ट्रांसमेम्ब्रेन
प्रोटीनों की
पहचान, जो उन
पैरासाइटों के
लिए विशेष रूप
से आवश्यक है
जो औषधि विकास
के लिए सक्षम
लक्ष्य हो
सकते है
-
एंटी-लिशमानिया
वाले औषधि
निर्माण के
लिए सब-सेलुलर
अॉर्गेनेली,
ग्लाइकोजोम
को टार्गेट
बनाना
-
देशी
पौधें से
प्राप्त डी.
एन. ए.
टोपॉजोमेरेस-आधारित
थेराप्यूटिक
एजेंटों का
विकास
-
डी.
एन. ए. टोपॉजोमेरेस
/ एडेनोसाइन
किनेस जैसे
महत्वपूर्ण
एंजाइमों का
संरचना-कार्य
संबंध
-
कोशिका
संकेतन के
संबंध में
प्रोटीन
किनेस
-
लिशमेनिया
में योजनाबद्ध कोशिका
मृत्यु
-
टीका
एवं
परीक्षणों का
विकास
-
वी.
कोलरा
में वीरूलेंस
जीन प्रकटीकरण
एवं दबाव बचाव
-
वी.
कोलरा की
वृद्धि, जीवन,
बायोफिल्म
निर्माण और
वीरूलेंस के
लिए आवश्यक
जीन के
प्रकटीकरण
में विविध
आंतरिक एवं
एक्स्ट्रासेलुलर
लघु संकेतन
अणुओं की
भूमिका
-
वी.
कोलरा जेनोम
की सी. टी. एक्स.,
आर. आर. एन. एवं
एस. एक्स. टी.
लोसी का जेनेटिक
मैपिंगताकि
नए संक्रामक
क्लोनों की
नेज गति से
होने वली
उत्पत्ति को
समझा जा सके,
और
-
शिगेला
प्रजातियोंका तुलनात्मक
जेनोमिक्स
उद्देश्य
-
लिशमानिया
डोनोवनी के
प्रकार I एवं
प्रकार II डी. एन.
ए. टोपोआइसोमेरेस
के अलग-अलग क्षेत्र
का संरचनागत
कार्य
-
थेराप्यूटिक्स
के विकास के
लिए लक्ष्य के रूप में लिशमानिया
डोनोवनी का
डी. एन. ए.
टोपोआइसोमेरेस
-
डी.
एन. ए.
टोपोआइसोमेरेस निषेधक
द्वारा प्रेरित
लिशमानिया
डोनोवनी की
योजनाबद्ध
कोशिका मृत्यु
-
मोडल
मैक्रो रोग के
रूप में
आंत्रिक
लिशमेनियासिस
का उपयोग करते
हुए रोग पैथोजेनेसिस
के संबंध में
मैक्रोफेज
जीवविज्ञान
-
लिशमेनिया
जैसे
यूकेरियोटिक
इंट्रासेलुलर
पैथोजेन की
संक्रामकता
में व्यापक
चक्रीय न्य़ूक्लियोटाइड
संकेतन
-
मैक्रोफेज
सहयुक्त
रोगों के
विरूद्ध
प्रभावी
चिकित्सा के
लिए
प्राकृतिक
मूल का इम्युनोमोडुलेटर
-
लिशमानिया
प्रोमेस्टिगोट
में प्रोटीन
किनेस एवं
प्रोटीन
फॉस्फेटेस का
नियमन
-
लिशमानिया
स्ट्रेन का
भंडारण,
रखरखाव और लक्षणनिर्धारण
-
मैक्रोफेज
एवं
लिशमानिया
डोनोवनी के
बीच अंतर्क्रिया
को नियंत्रित
करने के लिए
फॉस्फेटिडाइल
कोलाइन
हाइद्रोलाइसिस
के शामिल कर
संकेतन
क्रियाविधि
-
लिशमानिया
डोनोवनी
प्रोमेस्टिगोट
के
विकासात्मक
नियमित
गैलैक्टोसिलट्रांसफेरेज,
गैलेक्टेज टर्मिनल
ग्लाइकोकंजुगेट
एवं तनूकरण का
अध्ययन
-
लिशमानिया
के विरूद्ध
नया
कैमोचिकित्सीय
लक्ष्य की खोज
-
लिपोजोम-एनकैप्सुलेटेड
लिशमानिया
डोनोवनी
एंटीजेन के
एडजुवैन्टिसिटी
तथा रक्षात्मक
कुशलता पर
फॉस्फोलिपिड
संगठन की
भूमिका
-
आंत्रिक
लिशमानियासिस
के परीक्षण
हेतु सफल रक्त
आधारित जॉच का
विकास
-
प्रयोगात्मक
लिशमानियासिस
के विरूद्ध इम्युनोप्रोफिलैक्सिस
एवं
इम्युनोथेरापी
-
एल.
डोनोवनी के
होस्ट
रक्षात्मक
एण्टीजेन की पहचान
-
प्रयोगात्मक
आंत्रिक
लिशमानियासिस
के विरूद्ध
डी. एन. ए.टीका
-
लिशमानियासिस
के विरूद्ध
संकर कोशिका
टीकाकरण
-
डेंड्राइटिक
कोशिकाओं
द्वारा
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया
का मोडुलेशन
-
औषधीय
पैधा एवं
उनकी
सक्षमता से
संबंधित अध्ययन
-
बचपन
के गंभीर
लिंफोब्लास्तीक
ल्यूकेमिया में
ओ-एसेटिलेट
यूक्त
सियालोग्लाइकोकंजुगेट
(Neu 5.6Ac2 - GPALL) से
संबंधित
अध्ययन
-
स्वास्थ्य
एवं रोग में
जैवाणुओं के ग्लाइकोसिलेशन
के प्रभाव को
समझना
-
विभिन्न
प्रकार की
गंभीर
प्रावस्था
प्रतिक्रियाओं
में शामिल
मानव
सी-प्रतिक्रिया
प्रोटीन की
जॉच
-
विब्रियौ
कोलरा की
कोलोनाइजिंग
कुशलता पर hns मुटेशन का
प्रभाव
-
वी.
कोलरा में
दबाव बचाव एवं
विरूलेंस जीन
प्रकटीकरण से
संबंधित
अध्ययन
-
वी.
कोलरा के
पैथोजेनिक
क्लोन के
मूल्यांकन का
जेनोम
विविधता एवं
आणविक आधार
-
शिगेला
प्रजाति का तुलनात्मक
जेनोमिक्स
ताकि भारी
संक्रमणशील एस. डिसेंट्री
प्रकार के 1 क्लोन की
उत्पत्ति को
समझाजासके
दल के
सदस्य
वरिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
कनिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
अनुसंधान
सहायक
स्टाफ
सदस्य
पिछले 5
वर्षों में
महत्वपूर्ण
प्रकाशन एवं अनुसंधान
-
दास
बी. बी., सेन ए.,
राय ए.,
दासगुप्त एस.
बी., गांगुली ए.,
महन्त बी. सी.
और मोजुमदार
एच. के.
लिशमानिया डोनोवनी
द्वि-उप इकाई
टोपोआइसोमेरेस
1 का
विभेदात्मक प्रवेश
- चयनित
फ्लेवोन्स और
कैप्टोथेसिन
डी. एन. ए. क्लिवेज
संमिश्र : कैप्टोथेसिन
प्रतिरोध
टोपोआइसोमेरेस
1 के
विरूद्ध
फ्लेवोन्स की
क्रिया ।
न्यूक्लिक
एसिड रिस. 34,
1121-1132
-
देवनाथ
एम. सी., सरकार
बी. आर.,
गांगुली एस.
एवं बनर्जी
एस. -
क्वाबेजिलिल
के 99mTc - लेबल
वाले कंजुगेट
की तैयारी और
पशु मोडल में उनका
जैविक
मूल्यांकन ।
न्यूक्लियर
मेडिसिन
कम्युनिकेशन,
27, 271-279
-
राय
यू., देवनाथ एम. सी.,
सन्याल के.,
दास एम. के. और
बनर्जी एस. - मोडल के
रूप में
सिस्टिन का
उपयोग करनते
हुए तेक्लेटियम-99एम.
के थियोलेट
संमिश्र की
तैयारी में
रक्षात्मक
समूह की
भूमिका ।
जर्न्ल
अॉफ लेबेल्ड
कंपा. एंड
रेडियोफार्मास्यूटिकल्स
, 49, 835-847,
2006
-
सेन
एन., दास बी. बी.,
गांगुली ए.,
बनर्जी बी.,
सेन टी., मजुम्दार
एच. के. - लिशमानिया
डोनोवनी :
इंट्रासेलिलर
ए. टी. पौ स्तर
लुटियोलिन
प्रेरित डिस्किनेटोप्लास्टिड
कोशिकाओं के
एपाप्टोसिस
समान मृत्यु
को नियंत्रित
करता है । एक्सपे.
पारासिटोल,
114 : 204-214,
2006
-
दास
बी. बी., सेन एन., दासगुप्त
एस. बी.,
गांगुली ए.,
दास आर.
मजुम्दार एच.
के. - चिकित्सा
विज्ञान के
विशेष संदर्भ
में काइनेटोप्लास्टिड
पारासाइट
लिशमानिया का
टोपोआइसोमेरेस
अनुसंधान । इंडियन
जे मेड रिस.,
123, 221-232,
2006
-
सेनगुप्त
टी., मुखर्जी एम.,
दास आर., दास ए., मजुमदार
एच. के. - लिशमानिया
डोनोवनी टोपोआइसोमेरेस
के ग्यार ए आधे
में सक्रिय स्थल
अवशेष की पहचान
एवं डी. एन. ए.-बाइंडिंग
क्षेत्र का लक्षणनिर्धारण
। न्यूक्लिक एसिड
रिस. 33, 2364-2373, 2005
-
दास
बी. बी., सेन एन., दासगुप्त
एस. बी., गांगुली
ए., मजुमदार एच. के.
- लिशमानिया डोनोवनी
बाई-सबयूनिट टोपोआइसोमेरेस
1 के विशाल सबयूनिट
का एन.-टर्मिनल
क्षेत्र छोटे सबयूनिट
का साथ डी. एन. एन.
शिथिलीकरण एवं
अंतर्क्रिया में
शामिल है । जे.
बायो. केम. 280, 16335-16344, 2005
-
मन्ना
एम., मजुमदार एच.
के., सुंदर एस., भादुरी
ए. एन. - एम. एल. इ. इ. एवं
आर. ए. पी. डी.-पी. सी.
आर. द्वारा भारतीय
कालाजार रोगियों
से क्लिनिक में
वियोजित अणिओं
का लक्षणनिर्धारण
। मेड. साइ. मोनिट.
11, बी. आर. 220-227, 2005
-
सेनगुप्त
टी., मुखर्जी एम.,
दास ए., मंडल सी., दास
आर., मुखर्जी टी.
एवं मजुमदार एच.
के. - एल. डोनोवनी
से प्राप्त टोपोआइसोमेरेस
2 की एटीपेस क्रिया
का लक्षणनिर्धारण
तथा एटोपोसाइट
में प्रतिरोध करने
वाले अवशिष्ट की
पहचान । बायोकेम.
जे. 390, 419-426, 2005
-
कर्मकार
एस., वकील ए., मुखर्जी
एस., और दास पी. के.
- प्रोटोजोन पारासाइट,
लिशमानियासिस
डोनोवनी की अप्रभाविता
के संबंध में इंट्रासेलुलर
द्वारा ग्वानिलाइल
साइक्लेस का नियमन
। इंटर. जे. बायोकेम.
सेल बायो. 38, 1277-1289, 2006
-
माइती
एस., वकील ए., वेदसिरोमणि
जे. आर. और दास पी.
के. - चूहे में ब्लैक
चाय के बड़े एंटीआक्सिडेंट
थियाफ्लेविन-3,
3 डिगेलेट का जैवसंवितरण
एवं फार्माकोकाइनेटिक्स
। इंटर. जे. फार्माकोल.
2, 240-246, 2006
-
वकील
ए., माइती एस., और दास
पी. के. - आई. के. के.
एवं एन. एफ.-के. बी.
सक्रियन के निषेध
के साथ थियाफ्लेविन-3,
3 सी डिगेलेट द्वारा
प्रयोगात्मक कोलिटिस
की रक्षा । ब्रिट.
जे. फार्माकोल.
149, 121-131, 2006
-
वकील
ए., विश्वास ए., दास
टी. और दास पी. के.
- एन. एफ.-के. बी. के
सक्रियन के साथ
जुड़े प्रयोगात्मक
आंत्रिक लिशमानियासिस
में 18-बी-ग्लाइसिरेटिनिक
अम्ल ट्रिगर कुरेतिव
टी. एच. 1 प्रतिक्रिया
एवं नाइट्रिक आॅक्साइड
अप-विनियमन । जे.
इम्युनोलो. 175,
1161-1169, 2005
-
दे
आर., भट्टाचार्य
जे., तथा दत्त एस.
सी. - सिस्टिन प्रोटीज
कैल्डोनोपेन की
कैल्सियम आधारित
प्रोटियोलिटिक
क्रिया लिशमानिया
संक्रमण के दौरान
देखी जाती है ।
मोल. सेल. ब्श्योकेम.
281, 27-33, 2006
-
गुप्त
एस., रायचौधुरी
बी., बनर्जी एस., दास
बी. तथा दत्त एस.
सी. - इंट्रासेलुलर
कैल्सियम भंडर
लिशमानिया डोनोवनी
ग्लाइकोजोम में
विद्यमान है ।
प्रयो. पारासिटोल
113, 161-167, 2006
-
रायचौधुरी
बी., गुप्त एस., बनर्जी
एस. तथा दत्त एस.
सी. - पेरोक्सिजोम
इंट्रासेलुलर
कैल्सियम का भंडरण
है । बायोकेम.
बायोफिजि. एक्टा
1760, 989-992, 2006
-
रायचौधुरी
बी., बनर्जी एस., गुप्त
एस., सिंहा आर. बी.
और दत्त एस. सी. - लिशमानिया
डोनोवनी के विरूद्ध
ट्रिफेनाइल टिन
संमिश्र की एंटीपारासाइटिक
क्रिया । आक्टा.
ट्रोपिका, 95, 1-8, 2005
-
चक्रवर्ती
पी. डी., भट्टाचार्य
डी., पाल एस. और अली
एन. - मानव प्लेसेंटल
सार के साथ व्यवहृत
चूहा पेरिटोनियल
मैक्रोफेज द्वारा
नाइट्रिक आॅक्साइड
का इन विट्रो प्रवेश
। इंटर. इम्म. फार्मोकोल.
6, 100-107, 2006
-
मजुमदार
टी., आनम के. और अली
एन. - लिपोजोम कैप्सुलबद्ध
लिशमानिया डोनोवनी
एंटीजेन कि समीपता
एवं रक्षात्मकता
कुशलता पर फेस्फोलिपिड
संगठन का प्रभाव
। जे पारासिटोल.
91, 269-274, 2005
-
साहा
एस., मजुमदार टी.,
आनम के. रवीन्द्रन
आर., बैरागी बी., साहा
बी. गोस्वामी आर.
पी. प्रमाणिक एन.,
गुहा एस. के., कर एस.,
बनर्जी डी. और अली
एन. - भारतीय पी. के.
डी. एल. के विभेदात्मक
परीक्षण हेतु लिशमानिया
प्रोमेस्टिगेट
मेम्ब्रेन एंटीजेन
आधारित एलिशा एवं
इम्युनोब्लोटिंग
। जे. क्लिनि.
माइक्रोबायो.
43, 1269-1277, 2005
-
घोष
ए., पाल के. एवं चौधुरी
आर. - विब्रियो कोलरा
में विरूलेंस जीन
प्रकटीकरण के कोलोनाइजेशन,
गतिशीलता एवं बाइल
आधारित रिप्रेशन
में एच.-एन. एस. की
भूमिका । 74, 3060-3064, 2006
-
बनर्जी
एस. एवं चौधुरी
आर. - विब्रियो कोलरा
में एक यतीम डी.
एन. ए. (साइटोसाइन-5)
मिथाइलट्रांसफेरेस
। माइक्रोबायोलोजी
152, 1055-1062, 2006
-
भट्टाचार्य
टी., चटर्जी एस., माइती
डी., भद्र आर. के., टकेडा
वाई., नायार जी. बी.
और नन्दी आर. के.
- पर्यावरणीय विब्रियो
कोलरा नन-01, नन-0139 स्ट्रेन
के छोटे क्रोमोजोम
में एकीकृत सी.
टी. एक्स के rstR और
orfU जीन का आणविक विश्लेषण
। इनवाय. माइक्रोबिय.
8, 526-534, 2006
-
साहा
ए., देव आर., साहा एस.,
राममूर्ति टी.,
शिनोडा एस., मुखोपाध्याय
ए. के., भद्र आर. के.
- विब्रियो कोलरा
की पी. सी. आर. आधारित
पहचान तथा विब्रियो
कोलरा के बड़े
क्रोमोजोमल ओ.
आर. आई. अनुक्रम
का प्रयोग करते
हुए निकटतम संबद्ध
प्रजाति विब्रियो
मिमिकस । एफ. इ.
एम. एस. माइक्रोबा.
लेट. 257, 84-91, 2006
-
कुमाइ
वाई., सुजुकी वाई.,
तनाका वाई., शिमा
के., भद्र आर. के., रामासाकी
वाई., कुरोदा के.
एवं इंडो जी. - ओसाका
में एक एबेटायर
से प्राप्त सूअर
से वियोजित एस्चेरिया
कोलि स्ट्रेन का
बहुऔषधि प्रतिरोध
फेनोटाइप एवं जेनोटाइप
का लक्षणनिर्धारण
। इनफेक्ट. 133, 59-70,
2005
-
वंद्योपाध्याय
एस., चटर्जी एम., पाल
एस., बोनावली एस.,
नायर सी., आडवानी
एस., मागरथ आई. और
मंडल सी. - ओ.-एसेटिलेटेड
सियालिक अम्ल
के विरूद्ध एंटीबडी
: बचपन में गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया की
निगरानी के लिए
एक. तेज, गैर-छिपाव
संवीक्षा पद्धति
। इडियन जे. बायोकेम.
बायोफिजि. 43, 7-14, 2006
-
मुखोपाध्याय
(अब वंद्योपाध्याय)
सुमी और मंडल सी.
- लिशमानिया डोनोवनी
का ग्लाइकोबायोलोजी
। इंडियन जे. मेडि.
रिस. 123, 203-220, 2006
-
सरकार डी., दत्ता
ए., दास एम., सरकार
के., मंडल सी. और चटर्जी
एम. - स्फीति के समय
मैक्रोफेजेज द्वारा
नाइट्रिक आॅक्साइड
उत्पादन पर अलोय
वेरा का प्रभाव
। इंडियन जे. फार्माकोल.
37, 371-375, 2005
-
वंद्योपाध्याय
एस., मुखर्जी के.,
चटर्जी एम., भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल सी.
- पेडियाट्रिक
गंभीर लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) रोगियों
के सेरा में इम्युन-संमिश्र
रोग विशिष्ट 9-0-एसिटिलेटेड
सियालोग्लाइकैन
की खोज हेतु डी.
ओ. टी.-एलिशा का विकास
एवं मूल्यांकन
। जे. इम्मुनोलो.
मेथड. 297, 13-26, 2005
-
वंद्योपाध्याय
एस., भट्टाचार्य
ए., सेन ए. के., दास
टी., शॉ जी., भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल सी.
- ओ-एसिटिलेटेड
सियालोग्लाइकोकंजुगेट
के विरूद्ध अतिप्रकट
एंटीबडीज, जो बचपन
के गंभीर लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) में सटीक
प्रभावी कार्य
करने में अक्षम
है । इंटर. इम्मुनोलो.
17, 177-191, 2005
-
घोष
एस., वंद्योपाध्याय
एस., पाल एस., दास बी.,
भट्टाचार्य डी.
के. और मंडल सी. - गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) से ग्रस्थ
बच्चे में अतिप्रकट
रोग विशिष्ट 9-0-एसिटिलेटेड
सियालोग्लाइकोकंजुगेट
के सिमुलेशन में
प्रतिक्रिया में
परिधीय रक्त मोनोन्यूक्लियर
कोशिकाओं द्वारा
वर्धित इंटरफेरोन
गामा उत्पादन ।
ब्रिटिश जे. हिमाटोल.
128, 35-41, 2005
-
घोष
एस., वंद्योपाध्याय
एस., मल्लिक ए., पाल
एस., ब्लासाक आर.,
भट्टाचार्य डी.
के. और मंडल सी. - इंटरफेरोन
गामा उत्पादन के
गंभीर लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) में लिंफोब्लास्ट
अतिप्रकट 9-0-एसिटिलेटेड
सियालोग्लाइकोकंजुगेट
का बचाव करता है
। जे. सेल. बायोकेम.
95, 206-216, 2005
-
घोष
एस., भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल सी.
- बचपन के गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) में रक्ताल्पता
के दैरान परिवर्तित
एरिथ्रोसाइट मेम्ब्रेन
लक्षण । एन्न.
हेमाटोल. 84, 76-84, 2005
-
दत्त ए., मंडल
सी. और चटर्जी एम. -
भारतीय आंत्रिक
लिशमानियासिस
के वियोजित
एंटीमोनियल
प्रतिरोध की जाँच
के लिए संशोधित
एम. टी. टी. परीक्षण
का विकास ।
पारासिटोल.
इंटर. 54, 119-122, 2005
-
सिंह एस. के., सरकार
सी., मल्लिक एस.,
साहा बी. और भद्र
आर. - मानव प्लेसेंटेड
लिपिड बी. 16 एफ. 10 चूहा
मेलानोमा में पी
38 एम. ए. पी. के. के माध्यम
से मेलानोजेनेसिस
को प्रेरित करता
है । पिगमेंट सेल
रिस. 18, 113-121, 2005
-
मल्लिक एस., सिंह
एस. के., सरकार सी.,
साहा बी. और भद्र
आर. - मानव प्लेसेंटेड
लिपिड इन विट्रो
मेलानोजेनिक प्रोटीन
टाइरोसिनेस द्वारा
बी.16 / एफ. 10 कोशिकाओं
में मेलानोजेनेसिस
को प्रेरित करता
है । पिगमेंट सेल
रिस. 18, 25-33, 2005
-
सोन के. एच., पाक
यू. एन., सरकार सी.
और भद्र आर. - उच्च
कार्यनिष्पादक
द्रव क्रोमेटोग्राफी
द्वारा लाल रक्त
कोशिका सोर्बिटोल
स्तर का संवेदनशील
परीक्षण : डायबिटिज
के मूल्यांकन के
लिए सक्षम । क्लि.
किम. आक्टा. 354, 41-47, 2005
-
बेरा आर., नायक
ए., सेन, ए. के., चौधुरी
बी. पी. और भद्र आर.
- एसिडिफिलियम
स्ट्रेन जी. एस.
18 एच. / ए. टी. सी. सी.
55963, भारतीय तांबा
खान की वियोजित
मिट्टी से लिपोपोलिसैकेराइड
का वियोजन एवं
लक्षण निर्धारण
। एफ. इ. एम. एस. माइक्रोबिय.
लेट. 246, 183-190, 2005
-
बसु आर., भौमिक
एस., बसु जे. एम., नस्कर
के. डे टी. और राय
एस. - किनेटोप्लास्टिड
मेम्ब्रेन प्रोटीन-11
डी. एन. ए. टीकाकरण
प्रेरक नाइट्रिक
आॅक्साइड सिंथेस
क्रिया एवं आइ.
एल.-4 पीढ़ी के साथ
सहसंबंध बढ़ाने
वाले लिशमानिया
डोनोवनी के पेंटावेलेंट
एंटीमोनियल-संवेदी
और प्रतिरोघी दोनों
स्ट्रेनों के विरूद्ध
संपूर्ण सुरक्षआ
को प्रेरित करता
है : आंत्रिक लिशमानितासिस
में टी. एच. 1 एवं टी.
एच. 2 समान प्रतिक्रिया
के लिए प्रमान
। जे. इम्युनोल.174,
7160-7171, 2005
-
चक्रवर्ती
डी., बनर्जी एस.,
सेन ए., बनर्जी
के. के., दास पी.,
और राय एस. - लिशमानिया
डोनोवनी
लिपिड राफ्ट
में प्रकंपन
पैदा करके मैक्रोफेज
की एंटीजेन
प्रस्तुति को
प्रभावित
करता है । जे. इम्युनोल.175,
3214-3224, 2005
-
थिनर्ट एस.
एम., बासु आर.,
फोर्गबर एम.,
राय एस., सुंदर
एस. और वाल्डेन
पी. - भारत के बिहार
के कालाजार के
रोगियों के
सेर सेरा के
साथ
प्रकटीकरण क्लोनिंग
एवं इम्युनोब्लॉटिंग
द्वारा
आंत्रिक लिशमानियासिस
में नए
एंटिजेन की
पहचान । इनफेक्ट.
इम्युम. 73, 7018-7021, 2005
-
दे आर., सरकार
ए., मजुमदार एन.,
भट्टाचार्य (मजुमदार)
एस.,
रायचौधुरी
के., भट्टाचार्य
एस., राय एस. और मजुमदार
एस. - आंत्रिक लिशमानियासिस
के दौरान
म्युराइन
मैक्रोफेज
में केमोकाइन द्वारा
खराब पी. के. सी.
संकेतन का
नियमन । इनफेक्ट.
इम्युम. 73, 8334-8344, 2005
-
बसु एम. के. -
एंटिलिशमानिया
एजेंटों की
लिपोजोमल
डिलिवरी । जे.
एप्ला. रिस. 5, 221-236,
2005
-
बसु एम. के. और
राय एम. - मैक्रोफेज
एवं लिशमानिया
: एक
अस्वीकार्य
सहसंबंध । क्रिटि.
सिव्यू.
माइक्रोबियल.
31, 1-10, 2005
-
दास बी., सेन
एन., गांगुली ए.
और मजुमदार
एच. के. - लिशमानिया
डोनोवनी से
प्राप्त
असामान्य
द्वि-उपइकाई
टाइप 1 डी. एन. ए.
टोपोआइसोमेरेस
का पुनर्गठन
एवं
कार्यात्मक
लक्षणनिर्धारण
। एफ. इ. बी. एस.
लेट. 565, 81-88, 2005
-
सेन एन., दास
बी. बी., गांगुली
ए., मुखर्जी टी.,
त्रिपाठी जी., वंद्योपाध्याय
एस., रक्षित एस.,
सेन टी. और मजुमदार
एच. के. - कैंप्टोथेसिन
प्रेरित
मिटोकोंड्रियल
डाइफंक्शन
एकलकोशिका
हेमोफ्लेजेलेट
लिशमानिया डोनोवनी
में
योजनाबद्ध
कोशिका
मृत्यु को
नियमित करता
है । सेल डेथ
एंड डिंफ्रेंसिएशन.
11, 924-936, 2004
-
सेन एन., दास
बी. बी., गांगुली
ए., मुखर्जी टी., वंद्योपाध्याय
एस. और मजुमदार
एच. के. -
इंट्रासेलुलर
केशन
होमियोस्टेटिस
में कैंप्टोथेसिन
प्रेरित
असंतुलन एकलकोशिका
हेमोफ्लेजेलेट
लिशमानिया डोनोवनी
में
योजनाबद्ध
कोशिका
मृत्यु को
नियमित करता
है । जे. बायो.
केम. 279, 52366-52375, 2004
-
दास ए.,
सेनगुप्त टी.,
दासगुप्त ए.
और मजुमदार
एच. के. - किनेटोप्लास्टिड
पारासाइट का टोपोआइसोमेरेस
सक्षम
केमोथेराप्यूटिक
टारगेट के रूप
में । ट्रेंड
पारासिटोल. 20, 381-387,
2004
-
मुखर्जी एस.,
दास एल., कोले
एल., कर्मकार
एस., दत्ता एन.
और दास पी. के. - प्रयोगात्मक
आंत्रिक लिशमानियासिस
के इलाज
पारासाइट-विशिष्ट
इम्युनोलिपोजोम-एनकैप्सुलेटेड
डॉक्सोरूबिसिन
का टार्गेट
करना । जे.
इनफेक्ट डिस. 189,
1024-1034, 2004
-
पांडेय एस.,
चक्रवर्ती
पी., शर्मा आर., वंद्योपाध्याय
एस., सरकार डी.
और आढ्या एस. - प्रमास्टिगेट
मल्टिप्लिकेशन
में लिशमानिया
डोनोवनी मेजर
सतह ग्लाइकोप्रोटीण
जी. पी. 63 का
शामिल होना । जे.
बायोसाइ. 29, 15-22, 2004
-
श्रीनिवास
जी., सुब्बा
राजू बी. वी.,
सिंह आर., सेल्वापांडियन
ए., डंकन आर.,
सरकार डी.,
नखासी एच. एल.
और सालोट्रा
पी. - डी. एन. ए. पोलिमॉरफिज्म
परीक्षण लिशमानिया
डोनोवनी के वियोजन
को अलग करता है
जो कालाजार को
पैदा करता है,
जिससे मानव में
कालाजार के
बाद डर्मल लिशमानियासिस
होता है । जे.
क्लिन.
माइक्रोबायो.
42, 1739-1741, 2004
-
पाल एस., घोष
एस., वंद्योपाध्याय
एस., मंडल सी. एन., वंद्योपाध्याय
एस., भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल
सी. - ल्यूकेमिक
ब्लास्ट पर 9-0-एसिटिलेटेड
किया हुआ सियालोग्लाइकोकंजुगेट
का विभेदात्मक
प्रकटीकरण गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) से ग्रस्त
बाच्चों की
दीर्घावधि
निगरानी के
लिए एक सक्षम
यंत्र । इंटर.
जे. कैंसर. 111, 270-277, 2004
-
पाल एस., वंद्योपाध्याय
एस., चटर्जी एम.,
हॉल ए. जी., भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल
सी. - 9-0-एसिटिलेट किया
हुआ सियालोग्लाइकैन
के विरूद्ध
एंटीबडी :
बचपन में गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया (ए.
एल. एल.) में
चिकित्सीय
स्थिति की
निगरानी । क्लिनिक.
बायोकेम. 73, 395-403, 2004
-
चावा ए. के.,
चटर्जी एम.,
शार्मा वी.
सुंदर एस. और मंडल
सी. - 0-एसिटिलेट
किया हुआ सियालोग्लाइकोकंजुगेट
का विभेदात्मक
प्रकटीकरण
भारतीय लिशमानियासिस
में
पूरक-मध्यस्थ
हेमोलाइसिस
के भिन्न-भिन्न
रूप को प्रेरित
करता है । जे.
इनफेक्ट.
डिजिज 189, 1257-1264, 2004
-
चावा ए. के.,
चटर्जी एम.,
जर्विक जी. जे.,
केमरलिंग जे.
पी. और मंडल सी. - लिशमानिया
डोनोवनी एमस्टिगेट
पर सियालिक
अम्ल की
पहचान । बायोल.
केम. 385, 59-66, 2004
-
वंद्योपाध्याय
एस., चटर्जी एम.,
दास टी., चटर्जी
एम., सुंदर एस.
और मंडल सी. - लिशमानिया
डोनोवनी प्रोमेस्टिगेट
में 0-एसिटिलेट
किया हुआ सियालोग्लाइकोकंजुगेट
के विरूद्ध
किए गए एंटीबडी
पूरक क्रिता
को बढ़ाता है
। जे.
इनफेक्ट.
डिजिज 190, 2010-2019, 2004
-
पाल एस., घोष
एस., मंडल सी. एन., ब्रासमर
आर., शौसर आर.,
स्वार्ज-आल्बिज,
आर.,
भट्टाचार्य
डी. के. और मंडल
सी. - ल्यूकेमोक
कोशिका से 0-एसिटिलेट
किया हुआ सियालोग्लाइकोप्रोटीन
का आशोधन एवं
लक्षणनिर्धारण
तथा बचपन के
गंभीर लिंफोब्लास्टिक
ल्यूकेमिया की
निगरानी के
लिए
इम्युनोलोजोकल
यंत्र के रूप
में उनकी सक्षमता
। ग्लाइकोबायोलोजी
14, 859-870, 2004
-
दास टी., मंडल
सी. एन. और मंडल
सी. - प्रोटीन ए - मानव
सी -
प्रतिक्रिया प्रोटीन
के लिए एक नया
लिजेंड । एफ.
इ. बी. एस. लेट. 576, 107-113,
2004
-
वंद्योपाध्याय
एस., चटर्जी एम., पाल
एस., वैलर आर. एफ.,
सुंदर एस.,
मैकोनविले एम.
र मंडल सी. - 0-एसिटिलेट
किया हुआ सियालोग्लाइकोकंजुगेट
के विरूद्ध एंटीबडी;
उनका आशोधन,
लक्षणनिर्धारन
और परीक्षण के
लिए नए प्रोब
के रूप में
व्यवहार तथा भारतीय
आंत्रिक लिशमानियासिस
रोगियों की
अनुवर्ती
कारवाई । डायगो.
माइक्रोबियल.
नफेक्ट.
डिजिज 50. 15-24, 2004
-
साहा बी.,
टोंकाल ए. एम.
डी. जे.,
क्रोप्ट एस.
और राय एस. - होस्ट
रक्षा बनाम
प्रतिरक्षा बचाव
पर मास्ट
कोशिका । क्लिन.
एक्सपे. इम्युनो.
137, 19-23, 2004
-
राय के. सी., वंद्योपाध्याय
जी., रक्सित एस.,
राय एम. और वंद्योपाध्याय
एस. - आई. एल.-4 अकेले
जी. एम. सी. एस. एफ.
को शामिल किए
बिना मानव
परिधीय रक्त
मोनोसाइट को
सी. डी.-1 एडिम, सी.
डी.-83, योग
मेलॉयघ डेंड्रिटिक
कोशिका उप
इकाई को
रूपांतरित
करता है । जे.
सेल. साइ. 117, 3435-3445, 2004
-
वंद्योपाध्याय
जी., विश्वास
टी., राय के. सी.,
मंडल एस., पाल
बी. सी., भट्टाचार्य
एस., रक्षित एस., भट्टाचार्य
डी. के., चौधुरी
यू., कोनार ए. और वंद्योपाध्याय
एस. - क्रोनोजेनिक
अम्ल
क्रोनिक माइलोजेनस
ल्यूकोमिया
कोशिकाओं में
बी. सी. आर.-ए. बी.
आई. टायरोसाइन
किनेस को
निषेधित करता
है तथा पी-38
मिटोजेन सक्रिय
प्रोटीन
किनेस-निर्भर
एपाप्टोसिस
को उत्तेजित
करता है । ब्लड
104, 2514-2522, 2004
-
राय चौधुरी
बी., गुप्ता एस.,
बनर्जी एस.,
दास बी. और
दत्ता एस. सी. - तीब्र
पद्धति से
लिशमानिया ग्लाइकोजोम
का वियोजन । एनाल.
बायोकेम. 332, 404-408, 2004
-
पाल एस.,
रवीन्द्रन आर.
और अली एन. - स्टियरिलेमाइन-वाले
लिपोजोम में
सोडियम
एंटीमनी ग्लुकोनेट
वाले बी. ए. एल.
बी. / सी. चूहे के स्थापित
एवं जटिल लिशमानिया
डोनोवनी
संक्रमण का कंविनेशन
थेरापी । एंटीमाइक्रोब.
एजेंट केमोथर.
48, 3591-3593, 2004
-
रवीन्द्रन
आर., अनाम के.,
बैरागी बी. सी.,
साहा बी.,
प्रमाणिक एन.
गुहा एस. के.,
गोस्वामी आर.
पी., बनर्जी डी.
और अली एन. -
इम्युनोग्लोबिन
जी. का
लक्षणनिर्धारण
तथा
केमोथेरपी के
पहले और बाद
में भारतीय
कालाजार
संक्रमण में
उसकी उपवर्ग
प्रतिक्रिया ।
इनफेक्ट.
इम्युन. 72, 863-870, 2004
-
जुमदार टी., अनाम
के. और अली एन. -
लिशमानिया
टीका के
लिपोजोमल
निर्माण
द्वारा
एलिसीट किया
गया मिश्रित
टी. एच. 1 / टी. एच. 2
प्रतिक्रिया टी.
एच. 1 प्रतिक्रिया
को निर्देशित
करता है और
प्रवणशील बाल्ब
/ सी. चूहे में लिशमानिया
डोनोवनी में प्रतिरोध
पैदा करता है
। वैसीन 22, 1162-1171, 2004
-
कृष्णन एच.
एच., घोष ए., पाल
के. और चौधुरी
आर. - इन विब्रियो
कोलरा में विरूलेंस
कारकों के
प्रकटीकरण पर
एनाएरोबियोसिस
का प्रभाव । इनफेक्ट.
इम्युन. 72, 3961-3967, 2004
-
चटर्जी ए., चौधुरी
एस., साहा जी.,
गुप्ता एस. और
चौधुरी आर. - विब्रियो
कोलरा कोशिका सतह
परमियेबिलिटी
रोध एवं एफलक्स
पद्धति पर बाइल
का प्रभाव । जे.
बैक्टिरिय. 188, 6809-6814,
2004
-
पाल के., घोष ए., सेनगुप्ता
एन, और चौधुरी
आर. - पैथोजेनिक
विब्रियो कोलरा
स्ट्रेन के आर्चिवल
कल्वर में
स्थिर अवस्था
में
गैर-विषाक्त
मुटैंट का
प्रतिस्पर्धात्मक
वृद्धि लाभ । इनफेक्ट.
इम्युन. 72, 5478-5482, 2004
-
साहा ए.,
हरलालका एस.
और भद्रा आर.
के. - 13mer R दुहराव
में
प्राकृतिक
रूप से पैदा
होने वाला प्वायंट
मुटेशन
विब्रियो
कलरा 01 क्लासिकल
बायोटाइप के
बड़े
क्रोमोजोम के oriC कार्य को
प्रभावित
करता है । आर्च.
माइक्रोबियल.
182, 421-427, 2004
-
भोवाल के., भट्टाचार्य
एस., मजुमदार ए.,
गिरि सी., वन्नजा
आर.,
राममूर्ति
एन., गांगुली
एस., बनर्गी एस.
और चटर्जी देवनाथ
मीता - टेक्नेटियम-99
एम. डी. टी. पी. ए.
डिमिथाइल इस्टर
: रेनल कार्य
इमेजिंग एजेंट
। टेक्नेटियम-99
एम.
मरकेप्टोएसेटाइलट्रिग्लाइसिन
एवं 1311-आर्थो-आयोडोहिपुरेट
वाले पशुओं का
तुलनात्मक
अध्ययन । न्यूक्लियर
मेडिसिन कम्युनिकेशन.
24, 583-595, 2003
-
सेनगुप्ता
टी., मुखर्जी
एम., मंडल सी.,
दास ए. और मजुमदार
एच. के. -
काइनेटोप्लास्टिड
हेमोफ्लेगेलेट
लिशमानिया डोनोवनी
से टाइप II डी.
एन. ए. टोपोआइसोमेरेस
के सी-टर्मिनल
डोमेन का
कार्यात्मक
विभेदन । न्यूक्लिक.
एसिड. रिस. 31, 5305-5316, 2003
-
चौधुरी ए. आर.,
मंडल एस.,
गोस्वामी ए.,
घोष एम., मंडल एल.
चक्रवर्ती डी.
गांगुली एस.,
त्रिपाठी जी.,
मुखपाध्याय
एस.,
बंद्योपाध्याय
एस. और मजुमदार
एच. के. - डाइहाइड्रोबुटिलिनिक
अम्ल डी. एन. ए. टोपोआइसोमेरेस
I एवं II को
लक्षित कर लिशमानिया
डोनोवनी में एपाप्टोसिस
को प्रेरित
करता है : एंटिलिशमानियल
चिकित्सा में
उसका प्रभाव ।
मोल. मेडि. 9, 26-36, 2003
-
दत्त एन.,
मुखर्जी एस.,
दास एल., और दास
पी. के. - नाइट्रिक
अक्साइड
अनियमित एवं
टी कोशिका
सक्रियन के माध्यम
से
इम्युनोस्टिमुलेटरी
डी. एन. ए. क्यूर
प्रयोगात्मक
आंत्रिक लिशमानियासिस
को लक्षित
करना । यूरो.
जे. इम्यूनो. 33,
1508-1518, 2003
-
वकील ए.,
माइती एस.,
कर्मकार एस.,
दत्ता एन. और
दास पी. के. -
भोजन के स्वाद
को बढ़ाने
वाली हल्दी का
महत्वपूर्ण
अंग हरिद्रा
ट्रानिट्रोबेंजिन
सल्फोनिक
अम्ल-प्रेरित
कोलाइटिस में
मांसपेशीय
चोट को कम
करती है । बीआर.
जे. फर्माकोल. 139,
209-218, 2003
-
कर्मकार एस., बंद्योपाध्याय
के., विश्वास
ए., और दास पी. के. -
लेमिनिन बाइंडिंग
प्रोटीन का
मेम्ब्रेन
उन्मुखीकरण । यूर.
जे. बायोकेम. 270,
3806-3813, 2003
-
माइती एस., वकील
ए., कर्मकार एस.,
दत्ता एन., चौधुरी
टी.,
वेदशिरोमणि
जे. आर., गांगुली
डी. के. और दास
पी. के. - काली चाय
का बड़ा
पोलिफेनोल
थियारूबिगिन
ट्राइनिट्रोबेंजिन
सल्फोनिक
अम्ल-प्रेरित
कोलाइटिस में
मुकोसल चोट को
सुधारता है । यूरो.
जे. फर्माकोल. 470,
103-112, 2003
-
दास टी., सेन ए.,
केम्फ्ट, प्रामाणिक
एस. आर., मंडल सी.
एन., और मंडल सी. -
विभिन्न पैथोलोजिकल
अवस्था में
मानव
सी-प्रतिक्रियात्मक
प्रोटीन में
ग्लाइकोसिलेशन
का प्रवेश । बायोकेम.
जे. 373, 1-11, 2003
-
चटर्जी एम.,
चावा के.,
कोहला जी., पाल
एस., मर्लिंग ए.,
हिंडरलिच यू.,
अंगर पी.,
स्ट्रासर जी. जे.,
जर्विग जे. पी.,
कैमरलिंग आर.,
व्लासक पी.
आर., क्रोकर आर.,
शौसर आर., अल्बिज
एस. और मंडल सी. - लिशमानिया
डोनोवनी प्रोमैस्टिगोट
पर अवशोषित
सिरम सियालग्लाइकैन
की पहचान और
लक्षणनिर्धारन ।
ग्लाइकोबायोलोजी. 13, 351-374, 2003
-
दासगुप्त
बी., रायचौधुरी
के., गांगुली
एस., अकबर एम. ए.,
दास पी. और राय
एस. - लिशमानिया
डोनोवनी वाली
मानव
मोनोल्यूक्लियर
फैगसाइट एवं
मैक्रोफेज-समान
टी. एच. पी. 1 कोशिकाओं
का संक्रमण केमोकाइन
एवं केमोकाइन
रिसेप्टर के सबसेट
के प्रकटीकरण
के मोडुलेशन
को प्रभावित करता
है । स्कैंड. जे.
इम्यूनोल. 57, 366-374, 2003
-
घोष एम., पाल
सी., राय एम.,
मैत्रा एस.,
मंडल एल. और
वंद्योपाध्याय
एस. - डेंड्रिटिक
कोशिका-आधारित
इम्युनोथेरापी
एंटिमनि आधारित
केमोथेरापी
के साथ मिलकर
स्थापित
मुराइव आंत्रिक
लिशमानियासिस
को ठीक करता
है । जे.
इम्यूनोल. 170, 5625-5629, 2003
-
दासगुप्त
बी., रायचौधुरी
के., गांगुली
एस., सिंह पी. के.,
विमल एस., दास
पी. और राय एस. - एंटीलिशमानियाल
औषधि
इंटरफेरान-गामा
रिसेप्टर के
अप-नियमन का
कारण बनता है,
न केवल आंत्रिक
लिशमानियासिस
मामलों में,
बल्कि कल्चर
किया हुया टी.
एच. पी. 1
कोशिकाओं में
भी । एन.
ट्राप. मेड.
पारासिटोल. 97, 245-257,
2003
-
नन्दी एस.,
माइती डी.,
साहा ए., और
भद्रा आर. के. - विब्रियो
कोलरा 01
बायोटाइप इएल टोर
के विभिन्न
प्रकारों की
आनिवंशिकी : सी.
टी. एक्स.एफ.
किरण की
भूमिका और
जेनोम में उसकी
स्थिति । माइक्रोबायो.
149, 89-97, 2003
-
सेनगुप्त
एन., पाल के. और चौधुरी
आर. - विब्रियो कोलरा
में विरूलेंस
कारकों का
वैश्विक
नियामक
मोडुलेट
प्रकटीकरण । इनफेक्ट.
इम्युन. 71, 5583-5589, 2003
-
हरलालका एस.,
नन्दी एस.,
भद्रा आर. के. - विब्रियो
कोलरा के relA जीन में
मुटेशन विरूलेंस
कारकों के इन
विट्रो एवं इन
विवो
प्रकटीकरण को
प्रभावित
करता है । जे.
बैक्टेरियोल.
185, 4672-4682, 2003
-
दत्ता पी. पी.
और भद्रा आर.
के. - विरूलेंस
कारकों के शीत
आघात
प्रतिक्रिया
और बड़ी शीत
आघात प्रोटीन
। एप्लि.
इनवायो.
माइक्रोबियल.
69, 6361-6369, 2003
-
दास ए., मंडल
सी., दासगुप्त
ए., सेनगुप्त
टी. और मजुमदार
एच. के. -
किनेटोप्लास्टिड
प्रोटोजोयन लिशमानिया
डोनोवनी से टाइप
1 डी. एन. ए.
टोपोआइसोमेरेस
के सक्रिय
स्थल पर गहन
दृष्टि । न्यूक्लिक
एसिड रिस. 30, 794-802, 2002
-
वंद्योपाध्याय
के., कर्मकार
एस., घोष ए. और दास
पी. के. - लिशमानिया
के लैमिनिन
एवं लैमिनिन
बाइंडिंग
प्रोटीन के
बीच उच्च
सादृश्य बाइंडिंग
जिंक के
द्वारा
उत्तेजित
होती है और लैमिनिन
जिंक-फिंगर
समान अनुक्रम
को पैदा कर
सकता है । यूरो.
जे. बायोकेम. 269, 1622-1629,
2002
-
राय चौधुरी
ए., शर्मा एस.,
मंडल एस.,
गोस्वामी ए.,
मुखोपाध्याय
एस. और
मजुमदार एच.
के. - एक. नए
एंटीकैंसर फ्लेवोनोयड
लूटियोलिन
यूकेरियोटिक
ड. एन. ए. टोपोआइसोमेरेस
1 को विषाक्त
करता है । बायोकेम.
जे. 366, 653-660, 2002
-
अफ्रीन एफ.,
साजेश आर.,
अनाम के.
गोपीनाथ एम.,
पाल एस. और अली
एन. - लिपोजोम में
कैप्सुलिकृत लिशमानिया
डोनोवनी एंटीजेन
का
लक्षणनिर्धारण
जो बाल्ब / सी
चूहे में
रक्षात्मक
प्रतिरक्षा
को प्रेरित
करता है । इनफेक्ट.
इम्युन. 70, 6697-6706, 2002
-
भट्टाचार्य
एस., धोष एस.,
दासगुप्त बी.
मजुमदार डी., राय
एस. और
मजुमदार एस. - नाइट्रिक
आॅक्साइड के
उत्पादन के
माध्यम से
मुराइन मैक्रोदेज
में केमोकाइन
प्रेरित
लिशमानियासिडल
क्रिया । जे.
इनफेक्ट. डि. 185,
1704-1708, 2002
-
घोष एस., भट्टाचार्य
एस., सरकार एम.,
साहा जी. एस.,
दास टी.,
मजुमदार डी.,
राय एस. और
मजुमदार एस. - लिशमानिया
डोनोवनी सेरामिक
उत्पादन के
माध्यम से
होस्ट मैक्रोफेज
में सक्रिय
प्रोटीन 1 एवं
एन. एफ.-के. बी.
सक्रियन को
दबाता है । इनफेक्ट.
इम्युन. 70, 6828-6838, 2002
-
चावा के.
चटर्जी एम.,
सुंदर एस. और
मंडल सी. - एरिथ्रोसाइट
पर लिंकेज-विशिष्ट
ओ-एसेटिलेटेड
सियालोग्लाइकैन
के
प्रमात्रीकरण
के लिए एक परीक्षणविधि
का विकास । जे.
इम्युनोल.
मेथड 270, 1-10, 2002
-
पाल आई., मंडल
सी., एलेन ए. के.
और मंडल सी. - ताजे
एवं प्रदूषित
जलीय
पर्यावरण में
बड़े कार्प
कैटला कैटला
से प्राप्त
सी-प्रतिक्रितात्मक
प्रोटीनों के
आणविक प्रकार
। ग्लाइकोकंजुगेट
जे. 18, 547-556, 2002
-
पाल एस.,
चटर्जी एम.,
भट्टाचार्य
डी. के.,
वंद्योपाध्याय
एस., मंडल सी. एन.
और मंडल सी. - बचपन
के गंभीर
लिंफोब्लास्टिक
र्क्ताल्पता
में
परीक्षणीय
मार्कर के रूप
में ओ-एसिटाइल
सियालिक अम्ल
विशिष्ट IgM । ग्लाइकोकंजुगेट
जे. 18, 529-537, 2002
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