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औषधि
विकास,
परीक्षण एवं
जैवरासायनिक
प्रभाग
वैज्ञानिक
-
डॉ.
तरुण कुमार धर
(अध्यक्ष)
-
डॉ.
अनिल घोष
-
डॉ.
अपर्णा गोम्स
-
डॉ.
निर्मलेन्दु
दास
-
डॉ.
प्रताप के दास
-
डॉ.
सुमन खोवाला
-
डॉ.
शर्मिला
चट्टोपाध्याय
-
डॉ.
स्नेहसिक्ता
स्वर्णकार
परिकल्पना
स्वास्थ्य
एवं जीवन की
गुणवत्ता में
सुधार के लिए
और साथ ही
बहु-अनुशासनिक
दृष्टिकोण को
अपनाकर
जैवप्रौद्योगिकी
में नवोन्नयन
के माध्यम से
भावी आर्थिक
वृद्धि को
बढ़ावा देने के
उद्देश्य से
सुलक्षित
बुनियादी अनुसंधान
करना ।
उद्देश्य
यह
समूह
बुनियादी और
व्यावहारिक
दोनों प्रकार
के
जीवविज्ञान
के अनुसंधान
में संलग्न है
जिसमें
स्वास्थ्य,
कृषि और
प्रक्रिया
जैवप्रौद्योगिकी
के क्षेत्र
में विभिन्न
प्रकार के
विषय शामिल
हैं ।
अनुसंधान में
प्रमुख ध्यान
बुनियादी
जैविक अनुसंधान
के व्यवहार के
माध्यम से वाणिज्यिक
एवं औद्योगिक महत्व
के नए
उत्पादों,
प्रक्रियाओं
तथा जैवप्रौद्योगिकी
के विकास को
बढ़वा देने पर
है । अनुसंधान
क्रियाकलाप
के क्षेत्रों
में
निम्नलिखिन शामिल हैं :
-
न्यूरोप्लास्टिक
रोधी, अल्सर
रोधी, हेपाटोरक्षात्मक,
प्रदाहक रोधी,
एंटी-आक्सीडेंट
एवं
एंटी-लिशमानियासिस
एजेंटों के
लिए औषधीय
पौधे
-
पैधे,
माइक्रोब, पशु
या विष से
अग्रणी
जैवसक्रिय
यौगिकों का
वियोजन ताकि
उपयोगी
फार्मालोजिकल
क्रियाकलाप
हेतु उनका उपयोग
किया जा सके
-
गैस्ट्रिक
अल्सरेशन,
टिशु टार्गेट
वाला औषधि
निर्माण की
क्रियाविधि
की स्थापना
-
खाद्य
पदार्थों से
माइकोविषाक्त
चीजों का आकलन
करने हेतु
नवीनतम तथा
तीव्र
प्रतिरक्षात्मक
तकनीक का
निर्माण
-
जैवकुशलता
एवं पादप
औषधियों का
विश्लेषणात्मक
मूल्यांकन
-
मशरूम
स्पोरूलेशन
का जैवरसायन
-
यीस्ट
ट्रेहालोज
मेटाबोलिज्म
एवं एंजाइम / प्रोटीन
मरम्मत
-
जैवप्रौद्योगिकीय
व्यवहार के
लिए ग्काइकोसिडेस
एंजाइम के
उत्पादन एवं
रिसाव हेतु नियामक
क्रियाविधि
-
चिकित्सीय
/ न्यूट्रास्यूटिकल
के बेहतर उत्पादन
के लिए पादप
जीन
मैनिपुलेशन
दल के
सदस्य
वरिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
कनिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
अनुसंधान
सहायक
स्टाफ
सदस्य
| नाम |
पदनाम |
ई-मेल आई.
डी. |
| डॉ. (श्रीमती)
शिला इ. बेसरा |
टी. ओ. |
|
| श्री मोहन लाल
जाना |
टी. ओ. |
|
| डॉ. अर्धेन्दु
कुमार मंडल |
टी. ओ. |
|
| श्रीमती
दीपिका राय |
टी. ओ. |
|
| श्री रामधन
माझी |
टी. ओ. |
|
| श्री
प्रल्हाद
दास |
हेल्पर |
|
| श्री असित
मित्रा |
हेल्पर |
|
| श्री अर्णव
गुप्त |
|
|
| श्री
मौलिनाथ
आचार्य |
|
|
| सुश्री
असीमा
भट्टाचार्य |
|
|
अन्य जैसे
परियोजना
सहायक /
ग्रीष्म
प्रशिक्षु
आदि
पिछले 5
वर्षों में
महत्वपूर्ण
प्रकाशन
-
घोष
पी., बेसरा एस. इ., त्रिपाठी जी.,
मित्रा एस. और वेदसिरोमणि
जे. आर. - मानव के
ल्यूकेमिया
कोशिका
कोशिका लाइन K562 और पर तथा सी.
एम. एल. एवं सभी
रोगियों की
कोशिकाओं पर
चाय (कैमेलिया
साइनेंसिस वार.
असामिका) जड़
के सार (टौ. आर. इ.)
और उसके दो
स्टेरोयडल
सैपोनिन्स टी.
एस. 1 एवं टी. एस. 2
का साइटॉक्सिक
एवं
एपॉप्टोजेनिक
प्रभाव। ल्यूक.
रिस. 2006, 30(4),
459-468
-
चट्टोपाध्याय
पी., बेसरा एस. इ.,
गोम्स ए., दास
एम., सूर पी.,
मित्रा एस. और
वेदसिरोमोणि
जे. आर. - चाय
(कैमेलिया
साइनेसिस) जड़
सार का
एंटी-प्रदाहक
क्रियाकलाप । लाइफ
साइं. 2004, 74
(15), 1839-1849
-
पाल ए., और धर
टी. के. - अॉनसाइट
इम्युनोएसे
के लिए एक
विश्लेषणात्मक
उपकरण ।
अल्ट्राहाई
संवेदन्शीलता
वाले सैंपलों
के बैच में
एफ्लाटॉक्सिन
B1 की
अर्धप्रमान्नात्मक
खोज में उसकी
व्यवहार्यना
का प्रदार्शन
। एनाल. केम.
2004, 76(1),
98-104
-
पाल
ए., आचार्य डी.,
साहा डी. और धर
टी. के. - T-2 टॉक्सिन
की खोज के लिए
मेम्ब्रेन
आधारित
इम्युनोफिल्ट्रेशन
परीक्षण का
विकास । एनम.
केम. 2004,
76(14),
4237-4240
-
स्वर्णकार
एस., गांगुली
के., कुंडु पी.,
बनर्जी ए., माइती
पी. और शर्मा ए.
वी. - हरीद्रा
इंडोमेथासिन-प्रेरित
गैस्ट्रिक
अल्सर के
निवारण और ठीक
होने के दौरान
मैट्रिक्स
मेटालोप्रोटीनेस
9 एवं 2 के
प्रकटीकरण
एवं क्रिया को
नियमित करती
है । जे. बायो.
केम. 2005, 280,
9409-9415
-
गांगुली
के., कुंडु पी.,
बनर्जी ए.,
रीटर आर., जे. और स्वर्णकार
एस. - इंडोमेथासिन-प्रेरित
गैस्ट्रिक
अल्सर में मैट्रिक्स
मेटालोप्रोटीनेस
2 का हा इड्रोजन
पेरॉक्साइड-मध्यस्थ
डाउनरेगुलेशन
मेलाटोनिन
एवं अन्य
एंटीआक्सिडेंटों
द्वारा
अवरूद्ध किया
जाता है ।
फ्री.
रेडिकल बायो.
मेड. 2006 (प्रेस
में)
-
चक्रवर्ती
टी. के., बसु डी.,
दास एन., सेनगुप्त
एस. और
मुखर्जी एम. - प्लुरोटस
ओस्ट्रिटस (फ्लोरिडा)
में मैनिटोल
साइकल । एफ. इ.
एम. एस.
माइक्रोबियल.
लेटर. 2004, 236, 307-311
-
मुखर्जी
एस., बसाक एस. और
खोवाला एस. - टर्मिटोमाइसेस
क्लाइपिटस
के कल्चर
मीडियम में
सेलोबाइस के
साथ सह-समुच्चयन
पर सक्रिस की
क्रिया और
पुष्टि का
नियमन (परिवर्तन)
। बायोटेक्नोलोजी
प्रोग्रेस, 2002, 18,
404-408
-
सरकार
एस., और दास एन. - चूहे
के मस्तिष्क
में आयु
संबंधित
इस्चेमिया-रिपरफ्यूशन
प्रेरित आॅक्सिडेटिव
क्षति को
सुधारने में
मैनोसिलेटेड
लिपोजोमल फ्लेवोनोयड
। मेक. एजेइंग
डेवलपमेंट, 2006, 127,
391-397
-
मंडल ए.
के., बसु एम. के.,
चक्रवर्ती आर.
एन. तथा दास एन. - आर्सेनाइट
प्रेरित लीवर
फाइब्रोसिस
के विरूद्ध
लिपोजोमल फ्लैबनॉयड
की
हेपाटोरक्षात्मक
क्रिया । टॉक्सिकोलोजी,
2006 (प्रेस में)
-
बसु ए.,
भट्टाचार्य
एस., चौधुरी पी.,
सेनगुप्त एस. और
घोष ए. के. - सैच्चारोमाइसेस
सेरेविसिया द्वारा
एक्स्ट्रासेलुलर
ट्रेहालुस का
उपयोगा । बायोकेम.
बायोफिजिका
एक्टा 2006, 1760, 134-140
-
कुमार
ए. और
चट्टोपाध्याय
एस., - पुदीना के
रस का डि. एन. ए.
क्षति से
रक्षात्मक क्रिया
और विषाक्तता
विरोधी
संभावना । फुड
केमिस्ट्री 2006
(प्रेस में)
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