रसायन प्रभाग

वैज्ञानिक

  • डॉ. एस. बी. मंडल (अध्यक्ष)
  • डॉ. ए. के. सेन (वरिष्ठ)
  • डॉ. बी. सी. पाल
  • डॉ. ए. के. सेन (कनिष्ठ)
  • डॉ. एस. मुखोपाध्याय
  • डॉ. पि. चट्टोपाध्याय
  • डॉ. एस. वंद्योपाध्याय
  • डॉ. जी. सुरेश कुमार
  • डॉ. निरुप विकास मंडल
  • डॉ. पि. जयशंकर
  • डॉ. आर. मुखोपाध्याय
  • डॉ. आशीष कुमार बनर्जी
  • डॉ. आर. सी. यादव
  • डॉ. चिन्मय चौधुरी

मानद वैज्ञानिक

  • डॉ. प्रदीप के. दत्त
  • डॉ. वसुदेव आचार्य
  • डॉ. अनूप भट्टाचार्य

परिकल्पना

रसायन विभाग का लक्ष्य समाकलित प्रयासों के माध्यम से रासायनिक एवं जैविक समस्याओं का अध्ययन करना है ताकि पौधों सें नए अणुओं की खोज हो सके, संमिश्र अणुओं के लिए सिंथेटिक रणनीतियों का विकास हो सके, नैनोक्सोपीय पदार्थों एवं संगठित माध्यम में प्रतिक्रिया का अध्ययन और जैविक मैक्रोमोलेक्युल की अंतर्क्रिया का अध्ययन किया जा सके । इसके साथ ही, यह विभाग औद्योगिक एवं संस्थागत साझीदारों के साथ सक्रिय सहभागिता करके औषधि एवं अन्य महत्वपूर्ण जैवाणुओं के विकास में प्रतिभागिता भी करना चाहता है।

उद्देश्य

  • कार्बोहाइड्रेट व्युत्पादों से चाइरल साइक्लिक एथरो, एमिनेस और आर. एन. ए. एनालॉग के संश्लेषण के लिए रणनीति का विकास करना ।
  • स्क्रीनिंग जैविक क्रियाकलापों के लिए नई सिंथेटिक पद्धतियों, और संश्लेषीकृत यौगिकों का विकास करना ।
  • कार्बोहाइड्रेट व्युत्पन्न संरचनागत दृष्टि से अनोखे न्यूक्लियोसाइड के लिए पद्धति स्थापित करना ।
  • पादप औषधियों एवं अन्य जैवसक्रिय अणुओं का विकास करना तथा उन्हें वाणिज्यीकृत करना।
  • टीका उम्मीदवार के रूप में ओलिगोसैचेराइड एवं नियो-ग्लाइकोप्रोटीनों का संश्लेषण करना तथा ग्लाइकोबायोलोजी एवं ग्लाइकोविज्ञान के लिए संगत पैथोजेनिक बैक्टिरियल लिपोपोलिसैचेराइडों का संरचनागत अध्ययन करना ।
  • सक्षम एंटी-कैंसर, एंटी-हाइपरलिपिदेमिक और एंटी-माइक्रोबियल एजेंट के रूप में मीडियम रिंग हिटेरोसाइकल का निर्माण एवं संश्लेषण करना ।
  • क्विनोलाइन के आधार पर एंटी-लिशमानिया और एंटी-एंसेफेलिटिस यौगिकों के संश्लेषण हेतु पद्धति का विकास करना ।
  • संगठित माध्यम में चयनित जैविक प्रतिक्रिया करने हेतु नई प्रतिक्रिया पद्धति एवं रिएजेंट की खोज के लिए नए चाइरल सरफैक्टेंट का निर्माण एवं संश्लेषण करना ।
  • नैनोस्कोपीय पदार्थो, जैसे स्थिर नैनोकणों एवं नैनोफाइबरों का अध्ययन करना।
  • औषधीय पौधों से जैवसक्रिय उपादानों का वियोजन एवं लक्षण निर्धारण करना ।
  • पोलिमॉर्फिक न्यूक्लिक अम्ल संरचना में अल्कालोयड एवं अन्य प्राकृतिक उत्पादों को आबद्ध करने के लिए पद्धति, क्रियाविधि, अनुक्रम, विशेषता एवं ऊर्जात्मकता को समझना ।

दल के सदस्य
वरिष्ठ अनुसंधान अधिसदस्य / कनिष्ठ अनुसंधान अधिसदस्य / अनुसंधान सहायक

नाम पदनाम ई-मेल आई. डी.
सुश्री मधुमिता नाथ एस. आर. एफ.
श्री सुमित दे जे. आर. एफ. sumitdey_rs@iicb.res.in
सुश्री चुराला पाल जे. आर. एफ. churalapal@yahoo.co.in
श्री देवकुमार नन्दी जे. आर. एफ. debnandi_rs@iicb.res.in
श्री संजीत महतो जे. आर. एफ. sanjitkumar16@yahoo.co.in
श्री कौशिक मजुमदार एस. आर. एफ. k_majumder123@rediffmail.com
श्री गोरा दास एस. आर. एफ. goradas2@rediffmail.com
श्री प्रियदीप दास जे. आर. एफ. priyadip_home@rediffmail.com
ड: सीमा दत्त जे. आर. एफ.
श्री प्रियंकर पारिया जे. आर. एफ. priyankar_rs@iicb.res.in
श्री अभिजित हाजरा जे. आर. एफ. abhijit_hazra_ju@yahoo.com
सुश्री श्रावन्ती कुमार एस. आर. एफ. kumarsra@yahoo.com
ड: रंगना सिंहा आर. ए.
सुश्री काकली भद्र एस. आर. एफ. kakali_2004@ yahoo.com
श्री प्रबाल गिरि जे. आर. एफ. prabalgiri@yahoo.co.in
मो. मैदुल इस्लाम जे. आर. एफ. maidul1979@yahoo.com
श्री विश्वजीत गोपाल राय एस. आर. एफ.
श्री जयकृष्ण माइती एस. आर. एफ.
श्री रामप्रसाद घोष जे. आर. एफ.
श्री असीम राय एस. आर. एफ.
ड: (श्रीमती) मौमिता गुप्ता एस. आर. एफ. mou_gupta@yahoo.co.in
श्री के. धनवाल जे. आर. एफ. dhanabalrx@yahoo.com
श्रीट टी. पी. माझी एस. आर. एफ. tirthamajhi@yahoo.com
सुश्री ए. नियोगी एस. आर. एफ. arpita_neogi@yahoo.com
श्री संदीप कुमार होता एस. आर. एफ.
श्री मैदुल होसेन जे. आर. एफ. poppy_maidul@rediffmail.com
श्री अनुपम अधिकारी जे. आर. एफ. anupam_burdwan@yahoo.com
सुश्री इशिता सान्याल जे. आर. एफ. ishitasanyal@yahoo.co.in
श्री जेवेल हुसैन जे. आर. एफ. jewelhossain06@yahoo.co.in


स्टाफ सदस्य

नाम पदनाम ई-मेल आई. डी.
श्री कल्याण के. सरकार टि. ओ.
डॉ. शंकर के. मित्रा टि. ओ.
श्री असीत के. दास टि. ओ.
श्री शेखर घोष टि. ओ.
श्री सुबोध के. राय टि. ओ.
श्री दीप्येन्दु भट्टाचार्य टि. ओ.
डॉ. तापस सरकार टि. ओ.
श्री शंकर प्रसाद दत्त आशुलिपिक
श्री संदीप चौधुरी टि. ए.
श्री एस. के. सारखेल टेक
श्री राजेन्द्र महतो हेल्पर
श्री निमाई सी. प्रधान हेल्पर


अन्य जैसे परियोजना सहायक / ग्रीष्म प्रशिक्षु आदि

नाम पदनाम ई-मेल आई. डी.
श्री विनयगम जयरमन ग्रीष्म प्रशिक्षु
सुश्री रुक्मिणी चौधुरी पि. ए.
श्रीमती एम. चक्रवर्त्ती पि. ए.
श्री प्रसून के. प्रधान एस. पि. ए.
सुश्री सोहिनी दास शर्मा ग्रीष्म प्रशिक्षु


पिछले 5 वर्षों में महत्वपुर्ण प्रकाशनों की सूची

  • सेन ए. के., वरि. दास ए. के. सरकार के. के., ताकानो आर., कमेइ के. और हारा एस. - ग्रेटेलोपिया इंडिका बोयरजोनसेन (हैनिमेनियल्स, रोडोफिटा) से एंटीथ्रोमबोटिक सल्फेटेड पोलिसैकेराइड के लिए एक एगारॉयड-कारागीनम संकर प्रकार की रीढ़ संरचना । बोटेनिका मरीना, 2002, 45, 331-338
  • नन्दी ए. और चक्रवर्ती पी. - रेजियोसेलेक्टिव 8-एंडो-एरिल रेडिकल साइक्लिजेशन द्वारा डी-मैनोज से चाइरल ट्रांस-फुज्ड पाइरानो (3, 2-सी)(2) बेंजोक्सोसाइन का संश्लेषण । टेट्राहेड्रोन लेट., 2002, 43, 5977
  • साहू एन. पी., पाल सी., मंडल एन. बी., बनर्जी एस., राहा एम., कुंडु ए. पी., बसु ए., घोष एम., राय के. और वंद्योपाध्याय एस. - एक एन क्विनोलाइन व्युत्पाद का संश्लेषण, 2-(2-मिथाइलक्विनोलिन-4-इलामिनो)-एन-फिनाइलएसेटेमाइड - एक संभावनायुक्त एंटीलिशमानिया एजेंट । बायोआर्गो. मेड. केम. 2002, 10, 1687-1693
  • माइती एस., आचारी बी., मुखोपाध्याय आर. और बनर्जी ए. के. - हिटेरोएरिल रेडिकल्स भाग 1. एंडोसेलेक्टिव 2-पाइरिडाइल रेडिकल साइक्लिजेशन द्वारा लाइनियर पाइरिडाइन फुसरिंग पद्धति का संश्लेषण । जे. केम. सो. पर्किन ट्रांस 1, 2002, 1766-1773
  • घोड़ाई एस., भट्टाचार्य ए. बसाक ए. मित्रा ए. और विलियमसन आर. टी. - चाइरल डेंड्रिमर को आंतरिक रूप से कार्यकर बनाने हेतु एक व्यावहारिक दृष्टिकोण : फुरानोसाइड स्केलेटन को शामिल करते हुए डेंड्रिटिक अणु का संश्लेषण । जे. आरगे. केम. 2003, 68, 617-620
  • मेड्डा एस., जयशंकर पी., मन्ना आर. के., पाल बी., गिरि वी. एस. और बसु एम. के. - फॉस्फोलिपिड माइक्रोस्फेयर : प्रयोगात्मक लिशमानियासिस में एंटीलिशमानिया वाले एजेंट को लक्ष्य बनाकर एक नई डिलिवरी पद्धति । जे. ड्रग, टार्गेटिंग., 2003, 11, 123
  • चटर्जी ए., माइती डी. के., भट्टाचार्य पी. के. - जलीय माध्यम में जल को हटान पर प्रतिक्रिया : एक बर्तन में नाइट्रोन निर्माण एवं साइक्लोएदिशन । आर्गेनि लेटर., 2003, 5, 3967-3969
  • दास टी., सेन ए. के., केम्फ टी., प्रमाणिक एस. आर., मंडल सी. और मंडल सी. - विभिन्न पैथोलोजोलकल अवस्था में मानव सी-प्रतिक्रियात्मक प्रोटीन में ग्लाइकोसिलेशन की शुरूआत । बायोकेम. जे., 2003, 373, 345-355
  • राय चौधुरी ए., मंडल एस., गोस्वामी ए., घोष एम. मंडल एल., चक्रवर्ती ए., गंगुली जी., त्रिपाठी एस., मुखोपाध्याय एस., वंद्योपाध्याय एस. और मजुमदार एच. के. - डिहाइड्रोबेटुलिनिक अम्ल डी. एन. ए. टोपोआईसोमेरेस 1 एवं 2 को लक्षित करके लिशमानियासिस डोनोवनी में एपाप्टोसिस को प्रेरित करता है । मोलेक्वूलर मेडिसिन, 2003, 9 (1-2), 26
  • पांडा एन., मंडल एन. बी., बनर्जी एस., साहू एन. पी., कोयके के., निकायडो टी., वेबर एम. और लुगर पी. - ड्रेगिया वोलुबिलिस से पोलिहाइड्रोक्सी प्रिगेनेस । टेट्राहेड्रोन, 2003, 59, 8399-8403
  • बनर्जी एम., मुखोपाध्याय आर., आचारी बी. और बनर्जी ए. के. - 4ए-मिथाइल ट्रेहाइड्रोफ्लुयोरेंस डिटरपिनोयड - डिक्रोनन का प्रथम संपूर्ण विश्लेषण । आर्गेनिक लेटर, 2003, 5, 3931-3933
  • पाल बी., जयशंकर पी. और गिरि वी. एस. - बिस्चलर-नेपिरालस्की रिएक्टर अवस्था में चाइरल बी-कार्बेलाइन डाइमर का असामान्य निर्माण । टेट्राहेड्रोन लेटर, 2004, 45, 6489-6492
  • सिंघा के., राय ए., दत्त पी. के., त्रिपाठी एस., शाहाबुद्दीन शेख, आचारी बी. और मंडल एस. बी. - कार्बोहाइड्रेट-आधारित प्रिकर्सर पर इंट्रामोलेक्यूलर लाइट्रोन साइक्लोपएडिशन प्र्तिक्रिया : स्पिरोन्यूक्लियोसाइड एवं स्पिरोबाइन्यूक्लियोसाइड के संश्लेषण में व्यवहार । जे. आर्गेनि. केम., 2004, 69, 6507-6511
  • भट्टाचार्य जे., घोषमौलिक, आर., चौधुरी यू., चक्रवर्ती पी. भट्टाचार्य पी. के., लाहिड़ी पी., चक्रवर्ती बी., दासगुप्त ए. के. - हेमोग्लोबिन वैरिएंट का अनफोल्डिंग : यूरिया ग्रोडिएंट जेल इलेक्ट्रोफोरेस फोटोन कोरिलेशन स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं जिटा सक्षम माप की जानकारी । एनालिटिका चिमिका एक्टा., 2004, 552, 207-214
  • दत्ता आर., मंडल डी., पांडा एन., मंडल एन. बी., बनर्जी एस., कुमार एस., वेबर एम., लुगर पी. तथा साहू एन. पी. - प्रावस्था-अंतरण उत्प्रेरित अवस्था के अधीन फुज्ड ट्रिसाइकलिक ओक्सेजिनो-२-क्विनिलिन के संश्लेषण के लिए सामान्य पद्धति । टेट्राहेड्रोन लेटर, 2004, 45, 9361-9364
  • घोड़ाई एस. और भट्टाचार्य ए. - 3-पाइरानोन डिथियोकेटल में 0-प्रोपार्गिलग्लाइकोलेलडिहाइड्रेड का मर्करी (2) क्लोराइड मध्यस्थ साइक्लिजेशन-पुनर्व्यवस्थापन : 3-पाइरेनन्स में व्यावहारिक पॅहुच । आर्गेनि. लेटर, 2005, 7, 207-210
  • प्र्दान पी. के., दे एस., गिरि वी. एस. और जयशंकर पी. - मिथाइलिन डोनर के रूप में InCl3-HMTA : डाइ इंडोलाइ मिथेन (डी. आई. एम.) का संश्लेषण ओर उसका व्युत्पाद । सिंथेसिस, 2005, 1779-1782
  • राय ए., शाहाबुद्दीन शेख, आचारी बी. और मंडल एस. बी. - एनोज / वाइनोज नाइट्रिलिमाइन का साइक्लिजेशन इन सिटू : चाइरल ग्लाइकोपाइराजोल एवं पाइराजोलोन्यूक्लियोसाइड के संश्लेषण का एम व्यावहारिक दृष्टिकोण । टेट्राहेड्रोन, 2005, 61, 365-371
  • चौधुरी पी., पंजा एस., चटर्ज ए. भट्टाचार्य पी. और चक्रवर्ती एस. - 2-एसेटिल बेंजिमिडेजोल एवं २-बेजिमिडेजोल में प्रोटोट्रोपोज्म । ए., केम., 2005, 170, 131-141
  • गुप्ता एम., आचारी बी. और पाल बी. सी. - करकुलिगो आर्चियोआयोड्स से ग्लुकोसाइड । फाइटोकेमिस्ट्रि, 2005, 66, 659-663
  • बेरा आर., नायक ए., सेन ए. के., चौधुरी बी. पी. और भद्र आर. - एसिडिफिलियम स्ट्रेन GS18h / ATCC55963 भारतीय तांबा के खान से एक मिट्टी वियोजन से लिपोपोलिसैकेराइड का वियोजन एवं लक्षणनिर्धारण । एफइएमएस माइक्रोबियल. लेटर, 2005, 246, 183-190
  • भट्टाचार्य के., कर टी., बौसेली जी., कैटोनी ए., प्रमाणिक एस., बनर्जी एस. और मुखोपाध्याय एस. - 14-डिऔक्सीएंड्रोग्राफोलाइड का पुनर्निर्धारण । एक्टा. क्रिस्ट, 2005, 61, 2743-2745
  • नियोगी ए., माझी टी. पी., घोषाल एन. और चट्टोपाध्याय पी. - एक्सो-मिथाइलेन डेरिविटिव्स का रेडिकल साइक्लिजेशन : छाइरल ट्रिसाइक्लिक न्यूक्लियोसाइड एवं बेंजानुलेटेड ओक्सेपाइन डेरिवेटिव्स के संश्लेषण का एक व्यावहारिक दृष्टिकोण । टेट्राहाइड्रोन, 2005, 61, 9368
  • सेनगुप्ता एस., ड्रिउ एम. जी. बी., मुखोपाध्याय आर., आचारी बी. और बनर्जी ए. के. - कमारोविक्विनोन एवं फेवेलाइन मिथाइल एथर का इंट्रामोलेक्यूलर हेक प्रतिक्रिया के माध्यम से स्ट्रियोसेलेक्टिव सिंथेसिस । जे. आर्गेनि. केम., 2005, 70, 7694-7700
  • नाथ एम., मुखोपाध्याय आर और भट्टाचार्य ए. - चाइरल प्रिकर्सर से पाइरोलो (1, 2-ए) एजेपाइन स्केलेटन में डाइवर्जेंट साइक्लोएडिशन एवं रिंग क्लोजिंग मेटाथिसिस दृष्टिकोण : (-)-8-एपि-स्वैनसोनाइन ट्रिएसेटेट में एक व्यावहारिक पथ । आर्गेनि. लेटर, 2006, 8, 317-320
  • शाहाबुद्दीन शेख, ड्रिउ एम. जी. बी., राय ए., आचारी बी. और मंडल एस. बी. - ग्लुकोज व्युत्पन्न सबस्ट्रेस पर अनुक्रमीय रिंग क्लोजिंग मेटाथिसिस एवं नाइट्रोन साइक्लोएडिशन : स्पाइरोतनुकृत कार्बानुक्लियोसाइड एवं प्र्तिरोधी रूप से बंद न्यूक्लियोसाइड के एनालॉग में विभिन्नता पूर्ण दृष्टिकोण । जे. आर्गेनि. केम., 2006, 71, 5980-5992
  • प्रामाणिक एस., बनर्जी एस., आचारी बी., दास बी., सेन ए. के., वरि, मुखोपाध्याय एस., न्यूमैन ए. और प्रांजे टी. - एंड्रोग्राफिस पेनिकुलाटा से एंड्रोपैनोलाइड एवं आइसोएड्रोग्राफोलाइड, माइनर डिटरपिनोयड : संरचना तथा एक्सरे क्रिस्टेलोग्राफिक विश्लेषण । जे. प्रोडक्ट, 2006, 69, 403-405
  • चटर्जी ए., और भट्टाचार्य पी. के., - संगठित जलीय माध्यम में इंट्रामोलेक्यूलर नाइट्रोन साइक्लोएडिशन के माध्यम से चाइरल ओक्सेपेन एवं पाइरैन का स्टिरियोसेलेक्टिव संश्लेषण । जे. आर्गेनि. केम., 2006, 71, 345-348
  • सिंहा एस., पाल बी. सी., जगदिश एस., बनर्जी पी. पी., वंद्योपाध्याय ए. एवं भट्टाचार्य एस. - महानाइन कैसपासेस के एकेटी एवं सक्रियन के निष्क्रियन के माध्यम से प्रोस्टेट कैंसर कोशिका में वृद्धि को निषेधित करता है और एपाप्टोसिस को प्रेरित करता है । द प्रोस्टेट, 2006, 66, 1257-1265
  • जोयारदार ए., सेन ए. के. और दास एस. - डोकोसाहेक्सानोइक अम्ल एस्ट्रोसाइट में कोशिका परिपक्वीकरण एवं बी-एडरेनेर्जिक ट्रांसमिशन को बढ़ाता है । जे. लिपिड रिस., 2006, 47, 571-581
  • नियोगी ए., माझी टी. पी., मुखोपाध्याय आर. और चट्टोपाध्याय पी. - फुरानोज व्युत्पाद पर पैलेडियम-मध्यस्थ इंट्रामोलेक्यूलर एरिल एमिनेशन : चाइरल बेंजोएक्साजोसाइन व्युत्पाद एवं ट्राइसाइक्लिक न्यूक्लियोसाइड के संश्लेषण का एक व्यावहारिक दृष्टिकोण । जे. आर्गेनि. केम., 2006, 71, 3291
  • गिरि पी., हुसैन एम. और सुरेश कुमार जी., - आर. एन. ए. विशिष्ट अणु : साइटोटॉक्सिन पौधा अल्कालॉयड पालमेटाइन पोलि (ए) में दृढ़ता से बांधता है । बायोआर्गे. मेड. केम. लेटर, 2006, 16, 2364-2368
  • मंडल डी., पांडा एन., कुमार एस., बनर्जी एस., मंडल एन. बी. और साहू एन. पी. - करेया आरबोरिया के पत्ते से एंटीलिशमानिया वाली क्रियाकलाप वाले ट्राइटेरपेनाइड सैपोनिन । फाइटोकेमिस्ट्री, 2006, 67, 183-190
  • बनर्जी एम., मुखोपाध्याय आर., आचारी बी. तथा बनर्गी ए. के. - 4ए-मिथाइल हाइड्रोफ्लुयोरेंस डिटरपिनॉयड का सामान्य पथ : ट्‍वेवानीएक्विनेस डी एवं एच, ट्‍वेवानीएक्विनोल बी, डिक्रोएनल बी, तथा डिक्रोएनोन का संपूर्ण संश्लेषण । जे. आर्गेनि. केमि. 2006, 71, 2787-2796
 

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