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कोशिका
जीवविज्ञान
और दैहिकी
प्रभाग
वैज्ञानिक
-
डॉ. के. पी.
मोहन
कुमार
(अध्यक्ष)
-
डॉ.
सुमन्त्र
दास
-
डॉ.
सैयद एन.
कबीर
-
डॉ.
स्मृतिनाथ
चक्रवर्ती
-
डॉ.
तुली
विश्वास
-
डॉ.
अरुन
बन्द्योपाध्याय
-
डॉ.
तुषार
चक्रवर्ती
-
डॉ.
संध्या आर. डुंग
डुंग
-
डॉ.
पद्मा दास
-
डॉ.
शिवशंकर
राय
-
डॉ.
मृणालकांति
घोष
परिकल्पना
यह प्रभाग
सामान्य
दैहिकी एवं
रोगों के ममले
में पद्धति
एवं कोशिका
जीवविज्ञान,
उपकोशिका अग्रेनल्स
की जॉच तथा अंतर्कोशिकीय
संकेतन पर
कार्य करता है
। विशेष रूचि
तंत्रिका
तंत्र से
संबंधित रोगों,
पुनरूत्पादन
दैहिकी एवं
पुनरूत्पादन
के नियंत्रण, कार्डिक
हाइपरट्रोफी,
मधुमेह तथा
कुछ मेटाबोलिक
एवं
पारासिटिक बीमारियों
के क्षेत्र
में दर्शायी
जातीहै।
उद्देश्य
तंत्रिका
तंत्र की
खराबी के खंड
में याहॉ अनेक
परियोजनाएॅ
हैं जो
एस्ट्रोसाइट
के विकास की
संरचना एवं
कार्य पर
कारवाई कर रही है
ताकि
एस्ट्रोग्लायल
कोशिकाओं की प्लास्टिसिटी
में आंतरिक
नियामकों की
कार्रवाई की क्रियाविधि
का अध्ययन
किया जासके,
जिससे
नशारोधी औषधि
के विकास तंत्रिका
अनुत्पादन के आणविक
आधार और तंत्रिका
सुरक्षा के
लिए कार्य
नीति के विकास
और कोर्निल
रोपण में
स्टेम
कोशिकाओं और तंत्रिकाअनुत्पादक
बीमारियों में
नार्कोटिक
व्यसन के आधार
को समझा जा
सके ।
थायरायड
हार्मोन एवं
ग्लुकोकोर्टिकॉयड
द्वारा हृदय
की
दुष्क्रिया
की
क्रियाविधि
की जॉच
इंडोक्रिनोलोजी
अनुभाग में की
जाती है ।
इनके
अतिरिक्त
इंसुलिन
प्रतिरोध की
आणविक क्रियाविधि
और मधुमेह
प्रकार 2 में
इंसुलिन संकेतन
में त्रुटि,
हाइड्रोथायरायड
प्रेरित पुनरूत्पादन
खराबी के आनुवंशिक
आधार जिसमें
लाइसिल
हाइड्रोजाइलेस
की भूमिका पर
विशेष बल दिया
जाता है, एम. एम.
पी. एस. तथा टी.
आई. एम. पी. तथा ग्रभाशय के
कार्य में
होमियोडोमेन
रूपांतरण की भुमिका और
उसके विकास की
जॉच की जाती
है ।
पुनरून्पादक
जीवविज्ञान
अनुभाग के
अधीन स्पर्म
गतिशीलता और
उसके
क्रियाकलाप
के जैवरासायनिक
आधार,
पुनरूस्पादक
अपक्रिया को
रेखांकित
करते हुए पैथोफिजियोलोजिक
क्रियाविधि
की व्याखा तथा
एच. आई. वीरोधी
हॉलमार्क के
साथ
अवधारणात्मक 'ओवर द
काउंटर'
गर्भनिरोधी
पद्धति के
विकास की जॉच
की जाती है ।
आंत्रिक
लिशमानियासिस
के दौरान
रक्ताल्पता
के कारण,
प्रदर्शन एवं
प्रबंधन,
होस्ट-पैथोजेन
अंतर्क्रिया तथा
मानव
पोलियोमैवयरस
जे. सी. वी एवं
बी. के. वी. प्राकृतिक
वियोजनों की
आनुवंशिकी और
उसके साथ ही
माइक्रोबियल
आबादी के
मेटाजेनोमिक
विश्लेषण,
खासकर धातु
समृद्ध
पर्यावरण के एस्क्ट्रिमोफाइल
की जॉच भी इस
प्रभाग में की
जाती है ।
दल के
सदस्य
वरिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
कनिष्ठ
अनुसंधान
अधिसदस्य /
अनुसंधान
सहायक
स्टाफ
सदस्य
पिछले 5
वर्षों में
महत्वपुर्ण
प्रकाशन एवं
अन्वेषण
-
ए.
दासगुप्त, एस.
दास और पी. के.
सरकार (2005)
विकसित हो रहे
चूहे के प्रमस्तिष्क
में और
एस्ट्रोग्लायल
कल्चर में
जी-ग्लुटेमाइल
ट्रांसपेप्टिडेस
को थाइरायड
हार्मोन उत्प्रेरित करता है । जे.
न्यूरोसाइं.
रिस. 82,
851-857
-
ए.
जोयारदार, ए.
के. सेन और
सुमंत्रा दास
(2006) डोकोसाहेक्सानोइक
अम्ल
एस्ट्रोसाइट
में कोशिका
पोषण एवं बिटा
एंड्रेनर्जिक
ट्रांसमिशन
में मदद करता
है । जे. लिपिड.
रिस. 47,
571-581
-
के.
दे, जी. घोष, एम.
दत्त, ए. कोनार,
जे.
वंद्योपाध्याय,
डी.
वंद्योपाध्याय,
एस.
भट्टाचार्य
और ए.
वंद्योपाध्याय
(2004) सी-डी. एन.
ए. माइक्रोएरे
द्वारा
हाइपरथाइरायड-प्रेरित
हाइपरट्रोफायड
हृदय में
विभिन्न रूप
से प्रकट जीनों
का विश्लेषण ।
जे.
एंड्रोक्रिनोल
182, 304-314
-
एस. बनर्जी,
एस. आर.
डुंगडुंग, के
दास और जी. सी.
मजुमदार
(2006)
होमोलोगस
कोशिका आबादी
में कोशिका सतह
लेक्टिन और
उसके
रिसेप्टर का
सिंक्रोनोयस
मोडुलेशन ।
एक्स. सेल. रिस.
312,
22999-2308
-
एस.
वंद्योपाध्याय,
जे.
चक्रवर्ती,
एस. बनर्जी, ए.
पाल, एस. के
गोस्वामी, बी.
एन.
चक्रवर्ती,
एस. एन. कबीर
(2004) चूहे
में प्राइमोरडियल
जर्म कोशिका
माइग्रेशन :
गैलेक्टोसिलट्रांसफेरेज
की भूमिका का
प्राथमिक साक्ष्य
।
बायो.
रिप्रोड. 71,
1822-1827
-
एस.
के. गोस्वामी, टी.
दास, आर चट्टोपाध्याय,
बी साहनी, के. चौधुरी,
बी. एन. चक्रवर्ती,
एस. एन. कबीर (2004)
खराब गर्भाशय वाली
महिलाओं में कम
लागत की 4वी प्रोटोकोल
के रूप में लेट्रोजोल
का रैंडोमाइज्ड
एकल-अंध नियंत्रित
परीक्षण : प्राथमिक
रिपोर्ट । हुमन
रिप्रोड. 19, 2031-2035
-
एस.
साहा राय, जी. सेन,
टी. विश्वास (2005)
आंत्रिक लिशमानियासिस
में एरिथ्रोसाइट
मेम्ब्रिन में
फास्फेट परिवहन
के निषेध में बैंड
3 में सल्फिड्रिल
समूह की भूमिलका
। आर्च. बायोकेम.
बायोफिजि. 436,
121-127
-
जी.
सेन. एस. मंडल, एस.
साहा राय, एस. मुखोपाध्याय,
टी. विश्वास (2005)
आंत्रिक लिशमानियासिस
से जुड़े संक्रमण
एवं रक्ताल्पता
के नियंत्रण में
क्वेर्सेटिन के
चिकित्सीय प्रयोग
। फ्री रैड. बायो.
मेड. 38, 1257-1264
-
एस.
भट्टाचार्या और
टी. चक्रवर्ती
(2004) गुदा खराबी
और गर्भावस्था
के दौरान एशियाई
भारतीय में बीके
वायरस भिन्नता
का उच्च प्रतिसक्रियन
। वायरस जीन्स.
28, 157-168
-
के.
एस. श्रवणन, के. एम.
सिंधु, के. एस. सेंथिल
कुमर और के. पी. मोहनकुमार
(2006) एल-डिप्रेनाइल
चूहे में रोटेनन-प्रेरित
अॉक्सिधेटिव
दबाव-मध्यस्थ डोपामिनर्जिक
तंत्रिका अनुत्पादन
के विरूद्ध रोकता
है । न्यूरोकेम.
इंट. 49, 28-40
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